पटना, अरविंद शर्मा। Lalu Prasad Yadav Birthday चारा घोटाला (Fodder Scam) में जेल में लंबी अवधि बिताकर राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) अब बाहर आ चुके हैं। करीब पौने चार साल बाद जेल के बाहर शुक्रवार को अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। आरजेडी की ओर से इस दिन को सद्भावना दिवस (Sadbhawana Diwas) के रूप में मनाया जा रहा है। सभी प्रखंडों में लालू रसोई (Lalu Rasoi) का भी आयोजन किया जा रहा है। जेल से निकलकर लालू खुद अभी दिल्ली में बेटी मीसा भारती (Misa Bharti) के आवास पर हैं, लेकिन माना जा रहा है कि वे जल्‍दी ही बिहार आएंगे। बिहार की राजनीति पिछले तीन दशकों से उनकी परिक्रमा कर रही है। पक्ष हो या विपक्ष, किसी के लिए उन्‍हें नजरअंदाज करना कठिन रहा है। जेल में रहते हुए भी वह राजनीति से दूर नहीं हुए। आरजेडी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता भाई वीरेंद्र बताते हैं कि पौने चार साल बाद लालू प्रसाद जेल से बाहर आए हैं, तो साफ है कि सियासत नए सिरे से गरमाएगी। फिलहाल नजर उत्‍तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) पर है।

बंगाल के बाद अब यूपी के चुनाव पर नजर

आरजेडी के भाई वीरेंद्र के मुताबिक बंगाल (West Bengal Assembly Election) के बाद सबकी नजर उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव पर है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तैयारी भी शुरू कर दी है। लालू भी उससे अलग-थलग नहीं रह सकते हैं। पिछली बार बिना शर्त उन्होंने अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का समर्थन किया था। चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (BSP) के साथ समाजवादी पार्टी (SP) के गठबंधन की कोशिश भी की थी। इस बार भी उत्तर प्रदेश की राजनीति को लालू के हस्तक्षेप का इंतजार रहेगा।

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मांझी व मुकेश की महत्‍वाकांक्षा को देंगे हवा

बिहार में भी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी हिंदुस्‍तानी अवाम मोर्चा (HAM) प्रमुख जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुकेश सहनी (Mukesh Sahani) की महत्वाकांक्षा को शह देने से लालू पीछे नहीं रह सकते हैं। बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) के नतीजे आने के तुरंत बाद रांची जेल (Hotwar Jail, Ranchi) में रहते हुए भी लालू ऐसी कोशिश कर चुके हैं। बिहार में अब भी राजनीति का चक्का घूम रहा है। लालू कई वर्षों से कांग्रेस (Congress) के साथ महागठबंधन (Mahagathbandhan) कर बिहार में राजनीति कर रहे हैं। इस बार उन्होंने वामदलों (Left parties) से भी हाथ मिला लिया है। इससे उन्हें आरजेडी के परंपरागत वोट बैंक को बनाए रखने में मदद मिली है।

बिहार में माय समीकरण बचाने की चुनौती

लालू ने अपनी सोशल इंजीनियरिंग में यादवों (Yadavs) के साथ मुसलमानों (Muslims) को जोड़कर जो माय समीकरण (MY Equation) बनाया, उसे कोई भी दल नजरअंदाज नहीं कर सकता है। लालू के इस वोट बैंक (Vote Bank of Lalu Yadav) पर उनके विरोधियों की नजर है। बीजेपी व जनता दल यूनइटेड (JDU) की ओर से लगातार सेंध लगाने की कोशिश जारी है। कोरोना संक्रमण (CoronaVirus Infection) में गिरावट के बाद अब राजनीतिक गतिविधियां सामान्य होंगी तो लालू के बिहार आने की उम्‍मीद है। तब उनके सामने बड़ी चुनौती इसे बचाने की होगी।

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