पटना [कुमार रजत]। वे फिल्में कम बनाते हैं और अवार्ड ज्यादा जीतते हैं। वो भी नेशनल अवार्ड। बात हो रही है, मशहूर फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर की। 'चांदनी बार', 'पेज थ्री', 'ट्रैफिक सिग्नल', 'फैशन' और 'हीरोइन' जैसी फिल्में बनाने वाले मधुर जागरण फिल्म फेस्टिवल में शिरकत करने पटना आए हैं। उनसे खास बातचीत...

आज महिला प्रधान फिल्में खूब बन रही हैं? आपने 14 साल पहले 'चांदनी बार' बनाई थी? किस तरह देखते हैं इस बदलाव को?

- जब मैंने 2001 में 'चांदनी बार' बनाई थी, तो मेरी कोई खास पहचान नहीं थी। काफी नया था। फिल्म की लीड एक्ट्रेस तब्बू को भी बहुतों ने मना किया। किसी ने कहा, कैसा टाइटल है, मगर मुझे भरोसा था।

फिल्म चली और चार नेशनल अवार्ड जीते। उस दौर में महिला को केंद्रित में रखकर फिल्में कम बनती थीं। वह एक पहल थी। कामयाब हुई तो सिलसिला शुरू हो गया। अब तो खूब सारी महिला केंद्रित फिल्में बन रही हैं। ये बदलाव अच्छा है।

आर्ट और कॉमर्शियल फिल्मों का फासला भी कम हुआ है?

- देखिए, बदलाव हर दौर में होता है। दर्शकों का नया जेनरेशन आया है। मल्टीप्लेक्सेस के आने से फिल्मों के लिए स्क्रीन की कमी नहीं रही। निर्देशक भी रिस्क लेने लगे हैं। दर्शक भी आज कुछ हटकर चाहता है।

मगर मल्टीप्लेक्सेज के टिकट महंगे होते हैं? बहुत दर्शक इतना महंगा सिनेमा नहीं देख सकते?

- टिकट के रेट कम होने चाहिए। मैंने भी कई बार इसको लेकर आवाज उठाई है। सिंगल स्क्रीन इसलिए जरूरी भी हैं, क्योंकि वहां टिकट की कीमत होती है। फिल्मों का बजट नियंत्रण में हो, तो इस दिशा में काम किया जा सकता है।

आपने डेढ़ करोड़ में 'चांदनी बार' बनाई थी। आज फिल्मों का बजट 150 करोड़ को भी पार कर रहा है? क्या कहेंगे?

- समय के साथ फिल्म तकनीक में बदलाव आया है। महंगाई भी काफी बढ़ी है। मेरी फिल्म 'हीरोइन' में करीना कपूर के ड्रेसेज ही सिर्फ पौने दो करोड़ के थे। फिल्मों के प्रचार पर भी अब काफी खर्च होता है।

सितारों की फीस भी क्या बहुत ज्यादा नहीं है?

- टॉप स्टार्स अगर ज्यादा फीस लेते हैं, तो उसका फायदा भी फिल्मों को मिलता है। अगर कोई सितारा 20 या 30 करोड़ रुपये लेता है, तो उस फिल्म की मार्केट वैल्यू भी उस हिसाब से बढ़ जाती है।

फिल्मों के लिए स्टार और स्टोरी दोनों जरूरी है। अगर स्टोरी अच्छी हो तो फिल्म जरूर चलती है, लेकिन अगर बड़ा सितारा भी हो तो कमाई बंपर होती है।

खान तिकड़ी आपको आकर्षित नहीं करती? उनके साथ फिल्म करने का मन नहीं होता?

- मैं खास सब्जेक्ट पर फिल्म बनाता हूं। शाहरुख, सलमान, आमिर तीनों ही मुझे पंसद हैं। उनकी फिल्में भी देखता हूं। अगर कोई सब्जेक्ट ऐसा मिलेगा, जिसमें उनके लायक रोल होगा तो जरूर काम करूंगा।

बिहार राजनीति को लेकर हमेशा चर्चा में रहता है। आपने 'सत्ता' बनाई थी, मगर राजनीति में तेजी से नए बदलाव हुए हैं। क्या इस टॉपिक पर कोई नई फिल्म बनाएंगे?

- 'मैडमजी' फिल्म राजनीति के इसी नए बदलाव को लेकर है। हालांकि प्रियंका चोपड़ा के अमेरिकी टीवी सीरियल में व्यस्त होने के कारण फिल्म पर काम शुरू नहीं हो सका। इसमें बिहार-यूपी के ङ्क्षहदी बेल्ट की राजनीति की झलक दिखेगी।

'कैलेंडर गर्ल्स' इन दिनों चर्चा में है?

- हां, फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो गई है। फिल्म की कहानी पांच मॉडल्स पर आधारित हैं, जो नामी कैलेंडर इवेंट के लिए पोज देती हैं। पांचों मॉडल्स का किरदार नई अभिनेत्रियों ने निभाया है। फिल्म जल्द ही रिलीज होगी। उम्मीद है, दूसरी फिल्मों की तरह इसे भी दर्शकों का प्यार मिलेगा।

बिहार तो पहली बार आए हैं? यहां के बारे में पहले से क्या सुना जाना है?

- पटना के दर्शकों ने मेरी हर फिल्म को बहुत प्यार दिया है। पहली बार आया हूं मगर यहां के लोगों से सोशल मीडिया के जरिए जुड़ा रहा हूं। यहां काफी मेधा है। फिल्म इंडस्ट्री में भी यहां के काफी लोग हैं। यहां पटना साहिब गुरुद्वारा और महावीर मंदिर जाऊंगा। अगर कल समय मिला तो गया भी घूमने का इरादा है।

Posted By: Amit Alok

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