कौशलेंद्र कुमार, पटना। खेमका हत्याकांड की हर तफ्तीश कई कमजोर कड़ियों को सामने ला रही हैं। जांच में पता चला कि हत्या की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी। नहीं तो, बिना नंबर की बाइक, नाइन एमएम की पिस्टल और चालीस साल का एक आदमी अकेले हत्या कर कैसे भाग निकला? एेसे कई सवाल गुंजन खेमका की हत्या छोड़ गई।

ड्राइवर बजाया हार्न, आई गोली की आवाज

राजधानी के व्यवसायी गुंजन खेमका की हत्या में नाइन एमएम की पिस्टल का प्रयोग किया गया। हाजीपुर स्थित कॉटन फैक्ट्री की गेट पर जैसे ही उनकी हुंडई क्रेटा कार रुकी और ड्राइवर ने गेट खोलने के लिए हॉर्न बजाया, पहले से अपाचे बाइक पर घात लगाए अपराधी ने साइड वाली खिड़की के नजदीक जाकर तीन गोलियां चला दीं। हालांकि शुरू में सोशल मीडिया और कुछ वेब पोर्टल पर एके-47 से गोलियां चलाएं जाने की खबरे चलाई जाने लगीं लेकिन कुछ ही देर में यह साफ हो गया कि गोलियां एके-47 से नहीं बल्कि नाइन एमएम की पिस्टल से चलाई गई हैं और अपराधी भी एक ही था। बाद में पुलिस ने घटनास्थल के पास से नाइन एमएम के दो खोखे भी बरामद किए।

बाइक से भागते देखा गया अपराधी

घटना के कुछ घंटे के बाद पटना से एफएसएल की टीम पहुंची और गहनता से घटनास्थल की छानबीन की। टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाला। पटना से एसटीएफ के एसपी नीलेश कुमार के नेतृत्व में पहुंची टीम ने भी मौका-ए-वारदात का काफी देर मुआयना किया। औद्योगिक क्षेत्र में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में अपराधी को बाइक से भागते देखा गया। देखने से अपराधी की उम्र 40 वर्ष के आसपास बताई जा रही है। बिना नंबर की बाइक पर हेलमेट लगाए अपराधी पर पीछे से फैक्ट्री के कर्मियों ने पीछे से ईंट-पत्थर भी फेंके लेकिन वह भाग निकलने में कामयाब रहा। पुलिस सूत्रों को कहना है कि घटना को किसी प्रोफेशनल शूटर ने अंजाम दिया है।

मोबाइल में कैद है खेमका की हत्या का राज

बिहार के नामचीन व्यवसायियों में शुमार गोपाल खेमका के बड़े बेटे भाजपा नेता मोनू उर्फ गुंंजन खेमका की हत्या की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी। पुलिस को पूरा अंदेशा है कि वारदात को शार्प सुपारी किलर ने अंजाम दिया है। खेमका की मर्डर मिस्ट्री उनके मोबाइल में कैद है।

हाजीपुर इंडस्ट्रीयल एरिया में गुंजन की दो फैक्ट्रियां हैं। एक जीके कॉटन और दूसरा एक्सल पेपर पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड। पुलिस का शक इसलिए भी गहरा है क्योंकि अमूमन गुंजन कॉटन फैक्ट्री नहीं जाते थे लेकिन आज किसी का फोन आने पर वह कॉटन फैक्ट्री गए थे। वहां पहुंचते ही गेट पर ही उनपर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी गईं।

तीन साल से निजी ड्राइवर है मनोज

ड्राइवर मनोज रविदास पिछले तीन सालों से गुंजन का निजी ड्राइवर था। वह नौबतपुर का मूल निवासी है और घटना के समय गाड़ी में ही था। मनोज ने बताया कि गुंजन हर दिन पटना से दिन के 11 -12 बजे अपनी क्रेटा कार से हाजीपुर के लिए चलते थे और वहां से शाम पांच-छह बजे वापस पटना लौट आते थे। कभी-कभी जरूरत पडऩे पर ही खेमका कॉटन फैक्ट्री में जाते थे। गुरुवार को किसी ने उनके मोबाइल पर फोन कर पहले कॉटन फैक्ट्री में आने को कहा। जैसे ही वे अपनी गाड़ी से वहां पहुंचे और ड्राइवर ने गेट खोलने के लिए हॉर्न बजाया, पहले से घात लगाए अपराधी ने उन्हें अपना निशाना बना लिया। पुलिस ने मौके से खेमका का मोबाइल जब्त कर लिया है। उनका कॉल डिटेल को खंगाला जा रहा है।

जून में मिली थी अपहरण और जान से मारने की धमकी

गुंजन खेमका को जून से जुलाई माह के बीच तीन बार अपराधियों ने फोन कर रंगदारी मांगी थी। बात न मानने पर अपहरण करने और जान से मारने की धमकी दी गई थी। पहली बार 23 जून की शाम गुंजन खेमका के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आया था। इसके बाद कुछ दिनों के अंतराल पर दो बार और कॉल आया जिसके बाद गुंजन खेमका ने अपना वह मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया था। इस बात का जिक्र उन्होंने खुद गांधी मैदान थाने में दर्ज कराई एफआइआर में किया है। जुलाई में गुंजन ने अपने दोस्त राहुल शर्मा के साथ गांधी मैदान थाने पहुंचकर इस बाबत लिखित आवेदन दिया था।

पुलिस ने कहा, फोन करने वाला था साइको

इस बाबत एसएसपी मनु महाराज ने कहा कि गुंजन खेमका को धमकी मिलने की जांच पुलिस ने गंभीरता से की थी। जांच में पता चला कि गुजरात के एक नंबर से फोन किया गया था। फोन करने वाला साइको था। पूछताछ में मालूम हुआ कि उसने कई और लोगों को भी फोन किया था। इस घटना से उसके तार नहीं जुड़ते।

Posted By: Akshay Pandey

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