भागलपुर/ बांका, जेएनएन। जवाहर लाल नेहरू विश्‍वद्यिालय छात्रसंघ के पूर्व अध्‍यक्ष व भाकपा नेता कन्‍हैया कुमार शनिवार को भागलपुर व बांका में सभा को संबोधित किया। उन्‍होंने जन-मन यात्रा के तहत दोनों जगह पहुंचे थे। उन्‍होंने सीएए को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। भागलपुर के जगदीशपुर और बांका में बाराहाट स्थित भेरा मोड़ मैदान में सभाएं आयोजित की गई थीं। कन्‍हैया को सुनने के लिए काफी संख्‍या में लोग जुटे थे।  

भागलपुर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कन्‍हैया कुमार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के खिलाफ केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर हमला बोला। उन्होंने भागलपुर के पुरैनी में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सीएए और एनआरसी जैसे काले कानून को लागू कर हमें बांटना चाहती है। इसके लिए हम लोगों को एकजुट होकर इसके विरोध में लडऩा होगा।

उन्‍होंने कहा कि आज हमारी पहचान के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, लेकिन हम लोग ऐसा होने नहीं देंगे। ये बिहार की धरती है। यह बुद्ध, महावीर, गुरु गोविंद सिंह, जेपी और जगदेव बाबू की धरती है। यहां इस काले कानून को लागू नहीं होने देंगे। बिहार सरकार भी इसके लिए केरल की तरह विधान सभा में प्रस्ताव पास कर विरोध दर्ज कराए। 

कन्हैया ने कहा कि हमारे संविधान ने हां और ना दोनों कहने की आजादी दी है। आज हम लोग यहां ना कहने की आजादी के लिए जुटे हैं। उन्होंने पुरैनी के लोगों से ज्यादा से ज्यादा संख्या में पटना में आयोजित रैली में भाग लेने का आह्वान किया। कहा, सीएए और एनआरसी का मसला किसी एक समुदाय का मसला नहीं है। ये हम सभी का मसला है। इस लड़ाई में सभी को एक जुट होना होगा। 

उधर, बांका में आयोजित सभा में कन्‍हैया ने कहा कि देश को बांटने वाली राजनीति नहीं चलेगी। सबको बराबरी का हक देना होगा। उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा ठीक नहीं है। वह जनता को गुमराह कर रही है। बेरोजगारी से ध्यान भटकाया जा रहा  है। असली मुद्दे को छोड़कर सरकार एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दे ला रही है। उन्‍होंने कहा कि एनआरसी लागू होने से हिंदुओं को भी नुकसान होगा।

कन्हैया ने कहा कि मंदार हिल मनाली क्यों नहीं बन सकता है, लेकिन सरकार इस और ध्यान नहीं दे रही है। उन्‍हाेंने कहा कि यह देश गांधी का है। यहां सरकार की मनमानी नहीं चलेगी। गोडसे की नीति को नहीं चलने दिया जाएगा। 1947 में मिली आजादी को बचाने के लिए अब लड़ाई लड़नी होगी। इस सरकार में तीन करोड़ सोलह लाख लोगों ने नौकरी गंवाई है। 12 हजार किसान आत्महत्या के शिकार हुए हैं।

Posted By: Rajesh Thakur

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