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गंगा पर बनेगा कनेक्टिविटी का नया कॉरिडोर, उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बढ़ेगी सीधी कनेक्टिविटी

Published: Sat, 29 Aug 2026 05:06 PM (IST)

कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन गंगा महासेतु, लगभग 5,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित, अब तैयार है। यह 9.76 किमी लंबा ...और पढ़ें

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बढ़ेगी सीधी कनेक्टिविटी

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बढ़ेगी सीधी कनेक्टिविटी

HighLights

  1. कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन महासेतु लगभग तैयार है।

  2. उत्तर-दक्षिण बिहार की कनेक्टिविटी सुधरेगी, पटना का ट्रैफिक घटेगा।

  3. व्यापार, परिवहन और कृषि को मिलेगा नया रास्ता।

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार के बुनियादी ढांचे को नई पहचान देने वाली कच्ची दरगाह–बिदुपुर 6-लेन गंगा महासेतु परियोजना अब लगभग तैयार है। करीब 5,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार नमूना माना जा रहा है।

एक्स्ट्राडोज्ड केबल ब्रिज तकनीक से बने इस महासेतु की लंबाई करीब 9.76 किलोमीटर है। पुल 67 मजबूत पिलरों पर टिका है। पहुंच पथों को मिलाकर पूरी परियोजना की लंबाई 19.30 किलोमीटर है।

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच बढ़ेगी सीधी कनेक्टिविटी

महासेतु के चालू होने के बाद पटना का समस्तीपुर समेत उत्तर बिहार के कई इलाकों से सीधा और सुगम संपर्क स्थापित होगा। इससे यात्रा की दूरी और समय दोनों में कमी आने की उम्मीद है।

उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन आसान होने से व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। कृषि उत्पादों और वाणिज्यिक सामान की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगी। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।

पटना के ट्रैफिक दबाव को कम करने में होगी अहम भूमिका

पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, कच्ची दरगाह–बिदुपुर महासेतु सिर्फ कंक्रीट और स्टील का ढांचा नहीं, बल्कि बदलते बिहार की तस्वीर है।

पुल के चालू होने से वाणिज्यिक वाहनों की आवाजाही आसान होगी। राजधानी पटना पर बढ़ रहे यातायात के दबाव को कम करने में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उत्तर बिहार की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक और बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा। इससे पटना शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है।

पटना रिंग रोड और आमस-दरभंगा मार्ग से भी जुड़ेगा महासेतु

अधिकारियों के मुताबिक, इस महासेतु का जुड़ाव पटना रिंग रोड और आमस-दरभंगा मार्ग से भी होगा। इससे पुल महज नदी पार करने का रास्ता नहीं रहेगा, बल्कि बड़े सड़क नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा।

दानापुर, दीघा, शिवाला, बिहटा, कन्हौली, डुमरी और नयागांव जैसे इलाके इससे बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। तेलवारीचक, कच्ची दरगाह और सबलपुर समेत पटना के आसपास के क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी मजबूत होगी। इससे राजधानी के चारों ओर एक मजबूत कनेक्टिविटी हब तैयार होने की उम्मीद है।

व्यापार, परिवहन और कृषि को मिलेगा नया रास्ता

महासेतु के शुरू होने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक संपर्क और मजबूत होने की संभावना है। परिवहन समय घटने से कारोबारियों और मालवाहक वाहनों को फायदा मिल सकता है।

कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी बेहतर सड़क संपर्क मददगार साबित होगा। पथ निर्माण विभाग का मानना है कि परियोजना बिहार के विकास की गति को और तेज करेगी। आधुनिक सड़क नेटवर्क के विस्तार में यह पुल एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।

फैक्ट फाइल: एक नजर में महासेतु

  • पुल की लंबाई: 9.76 किलोमीटर
  • पुल और पहुंच पथ समेत कुल लंबाई: 19.30 किलोमीटर
  • परियोजना की लागत: करीब 5,000 करोड़ रुपये
  • पुल की तकनीक: एक्स्ट्राडोज्ड केबल ब्रिज
  • कुल पिलर: 67
  • मुख्य उद्देश्य: उत्तर-दक्षिण बिहार के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और पटना के ट्रैफिक दबाव में कमी