पटना, जेएनएन। डेंगू पीड़ित बच्चे की मौत के बाद मारपीट से आक्रोशित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पांच दिनों से जारी हड़ताल छठे दिन गुरुवार को खत्म हो गई है। जूनियर डॉक्टरों ने प्रधान सचिव से बातकर कार्य पर लौटने का निर्णय लिया।

एनएमसीएच जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ रवि रंजन कुमार रमन ने बताया कि प्रधान सचिव के साथ गुरुवार की सुबह बातचीत हुई। जिसके बाद छह दिनों से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल खत्म करने का निर्णय लिया गया है। एनसीएस के प्राचार्य डॉ विजय कुमार गुप्ता, अधीक्षक डॉ. गोपाल कृष्ण के साथ प्रधान सचिव ने बैठक की।

गुरुवार को रोज की अपेक्षा अस्पताल में इलाज के लिए कम ही मरीज आए। पांच दिनों से जारी हड़ताल को देखते हुए एहतियातन मरीजों की संख्या कम ही देखी गई। सुबह के समय काफी मरीज बिना इलाज कराए वापस लौट गए।

पांच दिनों तक मरीजों को हुई खासी परेशानी

इसके पहले बुधवार को हड़ताल के पांचवें दिन भी इमरजेंसी गेट के समीप ही धरना पर बैठे आंदोलनकारी डॉक्टर विरोध-प्रदर्शन करते रहे। पीजी छात्रों के साथ इंटर्न कर रहे छात्र-छात्र भी नारेबाजी कर रहे थे। इमरजेंसी में मंगलवार दोपहर भर्ती हुए डायरिया के मरीज संपतचक के सोहगी रामपुर निवासी 65 वर्षीय लाला रविदास की सही इलाज नहीं होने से बुधवार की सुबह मौत हो गई। इमरजेंसी आने वाले मरीजों को लौटना पड़ा।

मुख्य इमरजेंसी और शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में बेड मरीजों से खाली रहा। मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो सका। ओपीडी पहुंचे मरीजों को भी लौटना पड़ा। प्रभारी अधीक्षक डॉ. गोपाल कृष्ण ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। हड़ताल खत्म किए जाने को लेकर अभी तक जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल प्रशासन को कोई पत्र नहीं सौंपा है।

इमरजेंसी में मंगलवार की दोपहर भर्ती हुए डायरिया के मरीज संपतचक के सोहगी रामपुर निवासी 65 वर्षीय लाला रविदास की बुधवार की सुबह मौत हो गई। पुत्र चंदन रविदास ने बताया कि उल्टी और शौच होने के कारण पिताजी को यहां लेकर आए थे। इलाज ठीक से नहीं होने के कारण सुबह करीब दस बजे मौत हो गयी। इमरजेंसी आने वाले मरीजों को हड़ताल है कह कर लौटाया जाता रहा। इस दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा।

Posted By: Akshay Pandey

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस