पटना । मनरेगा की कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में पटना जिला परिषद का चयन नहीं हो सका है। जिलाधिकारी कुमार रवि का कहना है कि जिला परिषद के पास अभियंत्रण संगठन (इंजीनियरिंग सेक्शन) नहीं है, जबकि तकनीकी कार्य है। इसी वजह से जिला परिषद को कार्य नहीं दिया जा सकता है।

दो साल से जिला परिषद मनरेगा का कार्य लेने के लिए प्रयासरत है। जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सह जिला उप विकास पदाधिकारी आदित्य प्रकाश कहते हैं कि अभियंत्रण संगठन के लिए प्रयास किया जाएगा। पहले यहां अभियंताओं की टीम थी। जिला परिषद अध्यक्ष अंजू देवी कई बार जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मनरेगा के कार्य सौंपने की मांग कर चुकी हैं। जिला परिषद का चुनाव हुए दो साल से अधिक हो गया। जिले के विभिन्न हिस्सों से 45 सदस्य निर्वाचित होकर आए हैं।

ग्रामीण विकास विभाग के बिहार रुरल डेवलपमेंट सोसाइटी ने 22 जुलाई 2017 को मनरेगा योजना की क्रियान्वयन इकाई के रूप में जिला परिषद और पंचायत समिति को जोड़ने का अनुरोध किया था। इसके लिए निबंधन कराना पड़ता है। पटना जिला परिषद निबंधन के लिए आवेदन भी दे दिया है, लेकिन अभियंत्रण संगठन नहीं रहना बाधक बन गया है। पटना ही नहीं बिहार के किसी भी जिला परिषद को मनरेगा का कार्य नहीं मिल पाया। छपरा सहित कई जिले में जिला परिषद के पास सिर्फ एक-दो अभियंता रह गए हैं। एक-एक करके सभी अभियंता सेवानिवृत्त हो गए।

काम नहीं मिलने का पार्षदों को मलाल

जिला परिषद अध्यक्ष अंजू देवी का कहना है जिले के सभी पार्षद मनरेगा के कार्यो को करना चाहते हैं। मनरेगा का कार्य मिलेगा तो सफलतापूर्वक संपादित किया जाएगा। पहले यह कार्य जिला परिषद के जिम्मे ही हुआ करता है।

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