पटना [राज्य ब्यूरो]। लोकसभा चुनाव में देर है। लेकिन अभी से ही सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। ऐसे में जदयू भला पीछे कैसे रह सकती है। लोकसभा चुनाव में जदयू को तालमेल में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी सम्मानजनक संख्या में सीटें चाहिए। पार्टी के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने शनिवार को कहा कि झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी हमें सीटें चाहिए।

उन्होंने कहा कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के चेहरे का एनडीए को अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। नीतीश कुमार के नाम पर बिहार ही नहीं, बिहार के बाहर भी लोग एनडीए को वोट करेंगे। एनडीए के लिए प्रचार करने को उन्हें बिहार से बाहर भी बुलाया जाए।

त्यागी ने कहा कि झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां समाजवादियों का प्रभाव रहा है। जदयू इन राज्यों में एनडीए की ओर से अपना प्रत्याशी उतारेगा तो अंतत: एनडीए को ही लाभ होगा। उन्होंने कहा कि एनडीए के समक्ष 2019 लोकसभा चुनाव की जो चुनौती है उसका सामना करने के लिए नीतीश कुमार के चेहरे का बिहार के बाहर राष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले सीटों के बंटवारे और बिहार में राजग के चेहरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में तकरार हुई। भाजपा के अधिक सीटों पर दावे के बाद जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि अगर भाजपा को सहयोगी पार्टियों की ज़रूरत नहीं है तो वह अकेले ही सभी 40 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़े। जदयू अकेले चुनाव लड़ने को लेकर आश्‍वस्‍त है। हालांकि, उन्‍होंने यह भी कहा कि सीट बंटवारे का यह मसला बड़े नेता मिल-बैठकर सुलझा लेंगे।

जदयू  2015 के गत विधानसभा चुनाव के नतीजों को सीट बंटवारे का आधार बनाना चाहता है। गत विधानसभा चुनाव में बिहार की 243 सीटों में जदयू को 71 सीटें मिलीं थीं। तब भाजपा को 53 और लोजपा व रालोसपा को क्रमश: दो-दो सीटें मिलीं थीं। उस चुनाव में जदयू राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) तथा कांग्रेस के साथ महागठबंधन में था। बाद में वह राजग में शामिल हो गया।

अभी तक तय नहीं सीट बंटवारे का फॉर्मूला

जदयू को लेकर राजग में सीट बंटवारा का क्‍या फॉर्मूला हो, यह फिलहाल तय नहीं हो सका है। जदयू को कम सीटों से संतोष्‍ा नही, यह जाहिर है। अगले महीने दिल्ली में होने वाली जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा तय मानी जा रही है। भाजपा में भी इसे लेकर मंथन जारी है, क्‍योंकि बिहार में जदयू के जनाधार को देखते हुए वह नहीं चाहेगी कि गठबंधन की एकता पर कोई आंच आए।

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