पटना। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने आज राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्यों के नाम का एलान कर दिया। नई कार्यकारिणी में एक कोषाध्यक्ष, 11 उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और सात प्रवक्ता होंगे। इसके अलावा 51 लोगों को जिलाध्यक्ष बनाया गया है।

कोषाध्यक्ष : प्रो. रणवीर नंदन

उपाध्यक्ष : उदय नारायण चौधरी, पीके शाही, सतीश कुमार, चंद्रेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, दामोदर रावत, मनोज कुशवाहा, गणेश भारती, निहोरा प्रसाद यावद, अनिल हेगड़े, तनवीरूज्जमां ताज, राजनारायण पांडेय।

महासचिव : गिरिधारी यादव, लेसी सिंह, रंजू गीता, मंजीत सिंह, अभिराम शर्मा, नौशाद आलम, विनोद कुुमार चौधरी, अरुण कुमार सिंह, रामबालक सिंह, अजय पासवान, श्यामबिहारी राम, रविंद्र सिंह, ड़ॉ. नवीन कुमार आर्य, अनिल कुमार।

प्रवक्ता : संजय सिंह, नीरज कुमार, राजीव रंजन प्रसाद, अजय आलोक, नवल शर्मा, भारती मेहता, निखिल मंडल।

कार्यकारिणी समिति में खास

इस बार जदयू के नई कार्यकारिणी समिति की खास बात यह है कि इसका अाकार छोटा रखा गया है। कुल 200 सदस्यों वाली इस समिति मे 21 के बदले छह प्रकोष्ठ ही बनाए गए हैं। कार्यसमिति मे नए चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। जिन नेताओं को कैबिनेट में जगह नहीं मिली, उन्हें कार्यकारिणी में विशेष पद दिए गए हैं। इस बार समिति मे एक महिला प्रवक्ता को भी जगह दी गई है।

कल लगी थी नामों पर मुहर

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने शनिवार को नई कार्यकारिणी पर अपनी मुहर लगा दी थी। दोनों नेताओं की शनिवार को देर रात तक हुई बैठक में राज्य कार्यकारिणी पर फैसला लिया गया।

बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रशांत किशोर भी मौजूद थे। पिछली बार की तरह इस दफा भी छोटी समिति का गठन किया गया है।

पिछली राज्य कार्यकारिणी में आमंत्रित सदस्यों को लेकर करीब 80 पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल थे, जबकि पूर्व में पार्टी की राज्य कार्यकारिणी में शामिल लोगों की संख्या 250 को पार कर जाती थी।

क्या बरगद बनेगा चुनाव-चिह्न?

नए चुनाव-चिह्न के संबंध में पूछे जाने पर वशिष्ठ नारायण सिंह ने बताया कि बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई है। इसके लिए पार्टी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को अधिकृत कर दिया है। वे जल्द ही फैसला लेंगे। चुनाव-चिह्न बदलने का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया जा चुका है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि जिन तीन चुनाव चिह्नों पर चर्चा हो रही है, उनमें बरगद पर अधिक जोर दिया जा रहा है। बरगद पूर्व में संयुक्त सोशिलिस्ट पार्टी का चुनाव चिह्न था। इसके अलावा झोपड़ी और हल जोतता हुआ किसान पर भी विमर्श चल रहा है।

ये दोनों चुनाव-चिह्न क्रमश: चिह्न प्रजा सोशिलिस्ट पार्टी और लोक दल के रहे हैं। वर्तमान में जदयू का चुनाव-चिह्न तीर है, जिसके शिवसेना और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सिंबल से मिलता-जुलता रहने के कारण चुनाव में जदयू को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Posted By: Kajal Kumari

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस