जागरण टीम, पटना। बिहार से जातीय जनगणना को लेकर लगातार मांग उठ रही है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में दिए एक हलफनामे में केंद्र सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। सरकार अभी जतिगत जनगणना कराने के मूड में नहीं है। ऐसे में इस मुद्दे को लेकर दिल्ली गए बिहार के प्रतिनिधि मंडल को बड़ा झटका लगा है। अब सबकी नजर नीतीश कुमार के फैसले पर है। विपक्ष ने बिहार सीएम के पाले में गेंद डालते हुए अल्टीमेटम दिया है। सदन में नेता प्रतिपक्ष व राजद विधायक तेजस्वी यादव ने साफ कर दिया है कि महागठबंधन तीन दिन और इंतजार करेगा, उसके बाद एक्शन प्लान बनाएगा। वहीं जदयू को अभी पीएम नरेन्द्र मोदी से उम्मीद है। मंत्री संजय झा ने कहा है कि पीएम की तरफ से सकारात्मक जवाब आने की अपेक्षा है। यही बात जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी दोहराई है। उपेंद्र ने कहा है कि नरेन्द्र मोदी की तरफ से अभी जवाब आना बचा है। 

बिहार सरकार के जल संसाधन एवं सूचना व जनसंपर्क विभाग के मंत्री संजय कुमार झा ने पटना में मीडिया से बातचीत में कहा कि जनता दल यूनाइटेड (जदयू) 1990 से जातीय जनगणना की मांग उठाता रहा है। जातिगत जनगणना का मुद्दा किसी एक दल का नहीं है। बिहार की सभी राजनीतिक पार्टियां इसके समर्थन में है। इससे बिहार के साथ पूरे देश के विकास का मार्ग खुलेगा। संजय ने कहा कि बिहार के गए नेताओं के प्रतिनिधि मंडल की बात पीएम नरेंद्र मोदी ने सुनी थी। उन्होंने कहा था कि इस मांग पर गौर करेंगे। मंत्री ने कहा कि जो भावना लेकर बिहार के नेता गए थे हमें उम्मीद है कि पीएम उसपर कुछ सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे। झा ने कहा कि जब पहले जातीय जनगणना हुई थी तब डेटा फिगर अलग थे। अब जमीनी हकीकत बदल गई है। ऐसे में हमारी पीएम नरेन्द्र मोदी से हमारी अपेक्षा बनी हुई है। 

Edited By: Akshay Pandey