बिहार की 1.88 करोड़ महिलाओं तक पहुंचा जीविका का नेटवर्क, JDU ने 20 साल के सफर को बनाया संवाद का केंद्र
जदयू ने पटना में 'नीतीश संवाद' के तहत जीविका के 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया, जिसमें 1.88 करोड़ ...और पढ़ें

कार्यक्रम का शुभारंभ करते नीतीश कुमार, साथ में संजय झा, निशांत कुमार, उमेश कुशवाहा व अन्य।
HighLights
जीविका ने बिहार की 1.88 करोड़ महिलाओं को सशक्त बनाया।
नीतीश कुमार ने 2006 में जीविका कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता में जीविका की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राज्य ब्यूरो, पटना। जदयू प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को नीतीश संवाद के तहत जीविका के 20 साल बेमिसाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
इस मौके पर जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि जीविका शुरू करने का फैसला बिहार की आधी आबादी के जीवन में ऐतिहासिक बदलाव का आधार बना।
संजय ने कहा कि नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और एक वर्ष के भीतर ही 2006 में विश्व बैंक से ऋण लेकर जीविका कार्यक्रम की शुरुआत की।
जीविका से बदली बिहार की तस्वीर
वर्ष 2005 से पहले पटना में भी लड़कियों का साइकिल चलाना आम बात नहीं थी। लड़कियां पांचवीं-छठी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं।
लेकिन नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच और नीतियों ने बिहार में महिलाओं की स्थिति के साथ-साथ समाज की सोच को भी बदलने का काम किया।
जब भी महिला सशक्तीकरण की चर्चा होगी, नीतीश कुमार का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। सत्ता और राजनीति में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे।
लेकिन बिहार की महिलाओं के दिल से नीतीश कुमार का नाम कभी मिटाया नहीं जा सकता। महिला सशक्तीकरण जदयू की प्राथमिकता है।
'महिला सशक्तीकरण को दी सर्वोच्च प्राथमिकता'
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि महात्मा गांधी का मानना था कि स्त्री और पुरुष समाज रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं। यदि एक भी पहिया कमजोर हो जाए, तो गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती।
मुझे इस बात की खुशी है कि 2005 में सरकार बनने के बाद नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। शिक्षा, सत्ता और रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया।
पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में विश्व बैंक की सहायता से जीविका कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना था। आज जीविका महिलाओं के सम्मान, समृद्धि और सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
अलग-अलग कारोबार से सशक्त हो रहीं जीविका दीदियां
जीविका दीदियां कृषि, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, हस्तशिल्प और छोटे-छोटे व्यवसायों से जुड़़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं।
जीविका के 20 वर्षों की यात्रा हमें यह बताती है कि महिलाओं को मेहनत और हुनर का अवसर दिया जाए, तो वे न केवल अपने परिवार, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार ने 20 वर्ष पहले जिस जीविका की शुरुआत एक छोटे पौधे के रूप में की थी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।
इसकी छांव में एक करोड़़ 88 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भरता की अपनी कहानी लिख रही हैं। नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी सोच के कारण महिलाओं के जीवन में इतना बड़ा सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन आया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी की प्रदेश महासचिव डाॅ. श्वेता विश्वास ने की, मंच संचालन प्रदेश प्रवक्ता डा. अनुप्रिया एवं धन्यवाद ज्ञापन पल्लवी पटेल ने किया। बिहार के सभी 38 जिलों में जदयू द्वारा ‘नीतीश संवाद - जीविका के 20 साल बेमिसाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
