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IT इंडस्ट्री संकट में: चिप, RAM, SSD के दाम 300% तक बढ़े, महंगे होंगे मोबाइल और कंप्यूटर

Published: Thu, 09 Apr 2026 08:50 PM (IST)

IT Hardware Crisis: देश का आईटी हार्डवेयर सेक्टर गंभीर संकट में है। चिप, रैम और एसएसडी जैसे कंपोनेंट्स की कीमतों ...और पढ़ें

मोबाइल और कंप्यूटर होंगे महंगे

मोबाइल और कंप्यूटर होंगे महंगे

HighLights

  1. चिप, रैम, एसएसडी की कीमतों में 300% उछाल।

  2. मोबाइल, कंप्यूटर जैसे उपकरण अब अधिक महंगे होंगे।

  3. सेमीकंडक्टर कमी, AI मांग से संकट 15 माह तक।

जागरण संवाददाता, पटना। देश का आईटी हार्डवेयर सेक्टर इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहा है। चिप, रैम और एसएसडी जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतों में भारी उछाल ने पूरे उद्योग को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की कीमतों पर पड़ रहा है।

300% तक बढ़ी कंपोनेंट्स की कीमतें

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया आईटी एसोसिएशंस (FAIITA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि पिछले छह महीनों में DDR5 RAM और NVMe SSD की कीमतों में 300 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। पहले जहां इनकी लागत कुल उत्पाद का 10-15% होती थी, अब यह बढ़कर 50-55% तक पहुंच गई है।

मोबाइल और कंप्यूटर होंगे महंगे

कंपोनेंट्स की कीमत बढ़ने से मोबाइल, पीसी और सर्वर जैसे उपकरणों की लागत भी तेजी से बढ़ रही है। इससे बाजार में उपभोक्ताओं को इन उत्पादों के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।

टेंडर और सरकारी परियोजनाएं प्रभावित

कीमतों में अचानक बढ़ोतरी के कारण पहले से दिए गए सरकारी टेंडर अब व्यावसायिक रूप से अव्यवहार्य हो गए हैं। कई एजेंसियां समय पर आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई की स्थिति बन रही है। 

सेमीकंडक्टर संकट और AI की मांग वजह

मामले को लेकर फेडरेशन आफ आल इंडिया आइटी एसोसिएशंस से जुड़े संगठनों ने इस संबंध में चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप और राहत की मांग की है।

एसोचेम के अध्यक्ष विवेक साह ने बताया कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर की कमी और एआई आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग इसके पीछे बड़ी वजह है। कंपनियां अब एआई प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे सामान्य कंपोनेंट्स की उपलब्धता घट गई है।

10-15 महीनों तक जारी रह सकता है संकट

उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अगले 10-15 महीनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में संगठनों ने सरकार से राहत और टेंडर शर्तों में ढील देने की मांग की है, ताकि उद्योग को राहत मिल सके।