मृत्युंजय मानी, पटना। अपनी राजधानी में में देश का एक मात्र डॉल्फिन रिसर्च सेंटर होगा। इसके निर्माण में 71 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पांच अक्टूबर को विश्व डॉल्फिन दिवस के अवसर पर डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के भवन निर्माण का शिलान्यास करेंगे। अत्याधुनिक तकनीक से बनने वाले इस केंद्र का भवन जी2 होगा।

पटना लॉ कॉलेज के पास उपलब्ध कराई जमीन

केंद्र सरकार की तरफ से रिसर्च सेंटर के निर्माण के लिए वर्ष 2013 में ही 29 करोड़ रुपये आए थे। राशि आने के छह वर्ष बाद अब भवन का शिलान्यास होने जा रहा है। पटना विश्वविद्यालय की ओर से पटना लॉ कॉलेज के पास गंगा तट पर दो एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है। भूमि विवाद होने के कारण भवन का शिलान्यास नहीं हो पा रहा था।

मुख्यमंत्री ने भूमि नहीं मिलने पर इस केंद्र को भागलपुर ले जाने की डेढ़ वर्ष पहले घोषणा की थी। उसके बाद पटना विश्वविद्यालय प्रशासन आगे आया। एक साल पहले पटना विवि के कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह ने भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। रिसर्च सेंटर बन जाने से यहां देश-विदेश के विशेषज्ञ शोध करने के लिए आएंगे। पटना विश्वविद्यालय के छात्रों को भी डॉल्फिन पर शोध करने का मौका मिलेगा।

गौरतलब है कि पांच अक्टूबर 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गांगेय डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। डॉल्फिन को जलीय जीव घोषित कराने का श्रेय पटना विवि के प्रोफेसर डॉ. आरके सिन्हा को दिया जाता है। इसके लिए राजेंद्र सहनी नामक मछुआरे और उनकी टोली को भी श्रेय जाता है, जिन्होंने डॉल्फिन के रहन-सहन और खान-पान के विषय में काफी बातें उजागर की थीं। डॉल्फिन पर देश में पहली पीएचडी डॉ. गोपाल शर्मा के नाम है। डॉ. शर्मा फिलहाल भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के बिहार प्रभारी व वरीय वैज्ञानिक हैं।

निर्माण को लेकर कोई विवाद नहीं

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने कहा कि अब रिसर्च सेंटर के निर्माण को लेकर कोई विवाद नहीं है। 71 करोड़ की लागत से केंद्र का निर्माण होने जा रहा है। पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डॉल्फिन शोध केंद्र के भवन का शिलान्यास करेंगे।

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