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1 साल में 2 जोड़ी जूते खरीदते हैं भारतीय, चौंकाने वाला है अमेरिका का डेटा

Published: Mon, 19 Jan 2026 08:25 PM (GMT+05:30)

विकसित भारत के लक्ष्य के लिए बिहार को कौशल आधारित रोजगार पर ध्यान देना होगा। एफडीडीआई बिहटा के निदेशक नीरज ...और पढ़ें

1 साल में 2 जोड़ी जूते खरीदते हैं भारतीय (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, पटना। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिहार को कौशल आधारित रोजगार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। राज्य में संसाधनों और मानव शक्ति की कमी नहीं है, जरूरत है तो सही प्रशिक्षण और अवसरों को जोड़ने की। फुटवियर और चमड़ा उद्योग इस दिशा में बिहार के लिए बड़ी संभावना बनकर उभर रहा है। यह बातें सोमवार को जागरण विमर्श में फूटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई), बिहटा के निदेशक नीरज कुमार ने कहीं।

उन्होंने कहा कि फूटवियर डिजाइन और चर्म उद्योग में अपार संभावना है। भारत में प्रति व्यक्ति वर्ष में दो जोड़ी तो अमेरिका में सात जोड़ी से अधिक जूते की बिक्री होती है। भारत में फूटवियर का उत्पादन और खपत में विश्व में दूसरा स्थान पर है। चीन पहले नंबर पर है। भारत सहित 15 देश चमड़ा उद्योग के लगभग 80 प्रतिशत उत्पाद बनाते हैं।

बिहार में अवसर हैं, जरूरत है प्रशिक्षण की

नीरज ने कहा कि बिहार में युवाओं की आबादी काफी अधिक है। यहां लोगों और ऊर्जा दोनों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें उद्योग से जोड़ने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। एफडीडीआइ बिहटा इसी उद्देश्य से युवाओं को फुटवियर डिजाइन, प्रोडक्शन, फैशन और रिटेल जैसे क्षेत्रों में सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों तरह का प्रशिक्षण दे रहा है। सभी पाठ्यक्रम छात्रों को उद्योग के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं, जो डिजाइन, विनिर्माण, इंजीनियरिंग, सामग्री विज्ञान और विपणन की गहन समझ प्रदान करते हैं।

वैज्ञानिक पहलुओं के अध्ययन के बाद तैयार होता जूता

जूता हम रोज पहनते हैं, उसके पीछे पूरी टीम, तकनीक और इंजीनियरिंग जुड़ी होती है। इसमें फुट एनाटामी, शरीर का वजन, तापमान, आराम, मजबूती और टिकाऊपन जैसे कई वैज्ञानिक पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। यही वजह है कि फुटवियर और चमड़ा उद्योग संभावनाओं से भरा क्षेत्र है जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है।

फुटवियर और चमड़ा उत्पादों के उत्पादन व खपत में भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। ऐसे में बिहार जैसे राज्य, जहां श्रम शक्ति प्रचुर मात्रा में है, इस सेक्टर से बड़ा लाभ उठा सकते हैं। बिहार सरकार भी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े प्रयासों में सहयोग कर रही है।

मुजफ्फरपुर और किशनगंज में अपार संभावनाएं

जूता विभाग के प्रमुख, वरिष्ठ संकाय सदस्य, संजीव कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर और किशनगंज क्षेत्र चमड़ा उद्योग के लिए अत्यधिक संभावनाशील हैं। मुजफ्फरपुर के महवल में 62.17 एकड़ में लेदर प्रोडक्ट पार्क लगभग तैयार है, जहां सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। वहीं किशनगंज में 33.77 एकड़ में सीईटीपी (कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) सहित समर्पित क्षेत्र विकसित किया गया है।

उन्होंने बताया कि चमड़ा मांस उद्योग का बाय-प्रोडक्ट होता है। जानवरों की खाल को पहले नमक से सुरक्षित किया जाता है ताकि वह खराब न हो। इसके बाद प्रोसेसिंग यूनिट में नमक हटाकर अशुद्धियां साफ की जाती हैं। रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से कोलेजन को स्थिर किया जाता है, जिसे टैनिंग कहा जाता है। इसके बाद फिनिशिंग, डिजाइन और वैल्यू एडिशन किया जाता है।

सहायक प्रबंधक रुपाश्री ने बताया कि बिहटा में एफडीडीआइ पटना की स्थापना से बिहार शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण आयाम जुड़ गया है। यह संस्थान 10 एकड़ में फैला है और हास्टल में 720 छात्रों के रहने की सुविधा है।

संस्थान में फुटवियर डिजाइन एवं प्रोडक्शन, फैशन डिजाइन और रिटेल व फैशन मर्चेंडाइज जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। छात्रों को बेहतरीन प्रशिक्षण दिलाने के लिये विभाग की ओर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की मशीनें लगायी गयी है।