पटना [दीनानाथ साहनी]।  देश के इतिहास में पहली बार लोकसभा का चुनाव इतना लंबा चला। इसके अलावा यह चुनाव सियासी दिग्गजों की रिकार्ड जनसभाओं के लिए याद किया जाएगा। बिहार में सात चरणों के चुनावी समर में धुंधाधार प्रचार हुआ और कई जगहों पर पहली बार रोड शो के नजारे देखने को मिले। जाहिर तौर पर इसमें स्टार प्रचारकों को भी पसीना बहाना पड़ा है।

मतदाताओं को समझाने-बुझाने और अपने पक्ष में गोलबंदी के लिए उन्हें खूब मशक्कत करनी पड़ी है। बड़े नेताओं की जुबानी तल्खी हो या फिर ताबड़तोड़ जनसभाएं, संभव है कि इस बार इसके अलावा कोई दूसरा उपाय भी नहीं रहा हो। पिछले चुनाव से ही इसकी आशंका जाहिर की जा रही थी और राजनेताओं के बदलते स्वभाव के अलावा इस बार के माहौल ने भी इसके लिए मजबूर किया।

अब जबकि प्रचार अभियान थम गया है और नतीजों की घोषणा होने वाली है तो आकलन के लिए जानना जरूरी है कि आखिर किस हद तक मेहनत हुई।

प्रचार की गलाकाट प्रतिस्पर्धा

मिशन-2019 फतेह करने के लिए एनडीए और महागठबंधन के नेताओं ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। पहली बार जनता को बड़े नेताओं के बीच प्रचार की गलाकाट प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। बड़े नेताओं से लेकर सिने कलाकारों से रूबरू होने का मौका मिला।

चुनावी महाभारत के इस प्रचार युद्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, भाजपा के बिहार प्रभारी डॉ. भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान, प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और जीतन राम मांझी, फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा,

राजबब्बर, अभिनेत्री हेमा मालिनी और नगमा जैसे स्टार प्रचारकों को जनता ने करीब से देखा।

यह भी कम दिलचस्प नहीं कि इन नेताओं में से कई इस बार अपने राजनीतिक जीवन में सबसे ज्यादा चुनावी सभाएं करने का रिकार्ड भी बनाए। रिकार्ड के लिए जैसे उनमें होड़ लगी हो। कड़ी धूप में भी पार्टी की जीत की प्रतिबद्धता के साथ प्रचार करते रहे। 

एनडीए में सर्वाधिक सक्रिय रही भाजपा

बिहार में 40 संसदीय क्षेत्र हैं और दोनों गठबंधनों की कोशिश रही है कि हर क्षेत्र में किसी दिग्गज की जनसभा

जरूर हो। प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष की जनसभाएं ऐसे स्थलों पर हुईं, जहां के संवाद और आयोजन का आसपास के कम से कम चार-छह संसदीय क्षेत्रों पर असर पड़ता हो।

एनडीए के प्रचार कार्यक्रमों को देख रहे भाजपा के प्रदेश महासचिव राधा मोहन शर्मा ने बताया कि बिहार में कुल

566 जनसभाएं और 67 रोड-शो का आयोजन किया गया। इनमें राष्ट्रीय नेताओं की कुल 126 जनसभाएं

शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दस और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की 13 जनसभाएं हुईं।

पार्टी नेताओं द्वारा 67 रोड-शो भी किए गए। उसमें पटना में अमित शाह का एक रोडशो भी शामिल है। सर्वाधिक 43 रोड-शो में सुशील मोदी की सहभागिता रही। 

महागठबंधन में तेजस्वी की जनसभाएं सर्वाधिक

विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव महागठबंधन में सर्वाधिक जनसभा करने वाले नेता रहे। उन्होंने

234 जनसभाएं कीं। चार रोड-शो में भी वे मुख्य चेहरा रहे। कांग्रेस मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष एचके वर्मा के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की छह और सिने स्टार शत्रुघ्न सिन्हा की सात जनसभाएं हुईं।

राहुल का एक रोड-शो पटना में भी हुआ। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदनमोहन झा ने 26, बिहार कांग्रेस प्रभारी

शक्ति सिंह गोहिल ने 13 जनसभाएं कीं। गुलाम नबी आजाद, सुबोध कांत सहाय, अभिनेत्री नगमा और अभिनेता राजबब्बर ने दो-दो सभाएं कीं। लोजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशरफ अंसारी ने बताया कि बिहार में रामविलास पासवान ने 80 और चिराग पासवान ने 50 जनसभाएं कीं। छह रोड-शो में भी वे शामिल रहे। 

 

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Posted By: Kajal Kumari

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