पटना, जागरण संवाददाता। एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पर बाबा रामदेव के बयान के खिलाफ मंगलवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) समेत सभी चिकित्सा संघों ने ब्लैक डे मनाया। इस क्रम में पीएमसीएच के जूनियर डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगाकर बाबा रामदेव (राम किशन यादव) की गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना था कि यदि सरकार ने बाबा पर सख्त कार्रवाई नहीं की तो उनका आंदोलन उग्र हो सकता है। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के सचिव डॉ. कुंदन सुमन ने बाबा के बयान पर आक्रोश प्रकट किया। कहा, बाबा रामदेव का यह कहना कि जो डॉक्टर अपनी जान नहीं बचा पाए, वह दूसरों को क्या बचाएंगे, पूरी एलोपैथी विधा का अपमान है। साथ ही उन डॉक्टरों का अपमान है जिन्होंने संक्रमितों का इलाज करते हुए अपनी जान गवां दी। प्रदर्शन कर रहे डॉ. कुंदन समेत अन्य जूनियर डॉक्टरों का कहना था कि कोरोना इलाज के क्रम में संक्रमण से जिन डॉक्टरों की मौत हुई है, उन्हें हम शहीद मानते हैं। हमारी सरकार से मांग है कि उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाए और उनके आश्रितों को तत्काल सहायता राशि प्रदान की जाए।

डॉ. कुंदन सुमन ने कहा कि एक ओर केंद्र सरकार तीसरी लहर रोकने के लिए जल्द से जल्द अधिक से अधिक लोगों के टीकाकरण का प्रयास कर रही है, वहीं बाबा इसे लेकर भ्रम फैला रहे हैं। यह कृत्य देशद्रोह की श्रेणी में आता है। उनपर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

एनएमसीएच में भी डॉक्टरों ने काला बिल्ला लगा किया विरोध

कोविड अस्पताल एनएमसीएच में डॉक्टरों ने मंगलवार को काला बिल्ला लगाकर मरीजों का इलाज किया। मॉडर्न चिकित्सा पद्धति और डॉक्टरों को लेकर बाबा द्वारा दिए गए बयान का विरोध जताते हुए इन डॉक्टरों ने काला दिवस मनाया। एनएमसीएच में सीनियर व जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि बाबा रामदेव ने मेडिकल साइंस के साथ चिकित्सा जगत से जुड़े डॉक्टर, नर्स व स्वास्थ्य कर्मियों का अपमान किया है।

उन्होंने कहा कि एक ओर कोरोना मरीजों का इलाज कर डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी अपनी जान दे रहे हैं। देश भर में सैंकड़ों की मौत हो चुकी है। ऐसे में एक बाबा द्वारा आपत्तिजनक बयान देने के बाद केंद्र सरकार द्वारा उसके खिलाफ अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। डॉक्टरों का कहना था कि बाबा के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने तक विरोध जारी रहेगा।