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विश्वकर्मा पूजा पर IIT पटना का कमाल, सूटकेस में बिजली और दांत निकालने का आसान उपकरण; दो नवाचारों ने खींचा ध्यान

Published: Thu, 17 Sep 2026 07:00 AM (IST)

आईआईटी पटना के छात्रों और प्राध्यापकों ने विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर दो महत्वपूर्ण नवाचार प्रस्तुत किए हैं। इनमें एक ...और पढ़ें

अभिजीत कुमार, आईआईटी पटना के छात्र

अभिजीत कुमार, आईआईटी पटना के छात्र 

HighLights

  1. आईआईटी पटना ने दो तकनीकी नवाचार प्रस्तुत किए।

  2. पोर्टेबल सूटकेस इन्वर्टर बिजली की समस्या सुलझाएगा।

  3. दांत निकालने का नया उपकरण मैनुअल प्रयास घटाएगा।

जागरण संवाददाता, पटना। विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों और औजारों के साथ उन तकनीकी नवाचारों की भी चर्चा होती है, जो रोजमर्रा की मुश्किलों को आसान बनाने की कोशिश करते हैं। इसी कड़ी में आईआईटी पटना के छात्रों और प्राध्यापकों की टीम ने दो अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे उपकरण तैयार किए हैं, जिनका उद्देश्य बिजली की जरूरत और दांत निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

सूटकेस खोला और बिजली का इंतजाम

आईआईटी पटना के छात्र अभिजीत कुमार और उनकी टीम ने लिथियम आयन बैट्री से लैस सूटकेस इन्वर्टर तैयार किया है। इसे जरूरत के मुताबिक कहीं भी ले जाया जा सकता है।

एक बार चार्ज होने के बाद यह क्षमता के अनुसार कई घंटे तक बिजली उपलब्ध करा सकता है। इसका विकास कुलसचिव सह वरीय प्राध्यापक डा. एके ठाकुर के निर्देशन में हुआ है।

सेना के उपयोग को ध्यान में रखकर हुआ विकास

डीआरडीओ और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की परियोजना के तहत विकसित इस इन्वर्टर का वजन क्षमता के अनुसार सात से 17 किलोग्राम है।

इसकी क्षमता 250, 500, 850, 1000 वीए से लेकर पांच केवीए तक बताई गई है। इसे विशेष रूप से सेना के उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था।

बिहार समेत कई राज्यों में बिक चुके 2000 यूनिट

यह सूटकेस इन्वर्टर करीब दो वर्ष पहले बाजार में आ चुका है। टीम के अनुसार तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों में अब तक करीब 2000 यूनिट की बिक्री हो चुकी है। इसका उद्देश्य जरूरत के स्थान पर आसानी से बिजली उपलब्ध कराने की सुविधा देना है।

अब दांत निकालने में कम होगा मैनुअल प्रयास

आईआईटी पटना के मैकेनिकल विभाग के प्राध्यापक डा. कराली पात्रा और उनकी टीम ने मैकेनाइज्ड पावर एलिवेटर विकसित किया है।

हाजीपुर के दंत चिकित्सक डा. शशि कुमार के सहयोग से तैयार इस उपकरण का उद्देश्य दांत निकालने की प्रक्रिया में मैनुअल प्रयास को कम करना है।

चार साल की मेहनत के बाद पेटेंट

इस उपकरण पर वर्ष 2022 से काम चल रहा था और अप्रैल 2024 में इसे पेटेंट ग्रांट हुआ। शोध छात्र अक्षय सक्सेना ने भी इसके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब टीम इसे आम लोगों तक पहुंचाने के लिए बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है।

विश्वकर्मा पूजा पर नवाचार की दो तस्वीरें

एक ओर ऐसा सूटकेस तैयार हुआ है, जो जरूरत के समय बिजली का विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश करता है, तो दूसरी ओर दंत चिकित्सा में मैनुअल प्रक्रिया को आसान बनाने वाला उपकरण विकसित किया गया है। दोनों नवाचारों में तकनीक को रोजमर्रा की जरूरत से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।