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Bihar Industry: IIM बोधगया बनाएगा बिहार की नई औद्योगिक नीति का रोडमैप, निवेश बढ़ाने के लिए हुआ बड़ा समझौता

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:35 PM (IST)

उद्योग विभाग और आईआईएम बोधगया ने बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 (BIIPP-2026) तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर ...और पढ़ें

IIM बोधगया निभाएगा नॉलेज और रिसर्च पार्टनर की भूमिका

IIM बोधगया निभाएगा नॉलेज और रिसर्च पार्टनर की भूमिका

HighLights

  1. उद्योग विभाग और आईआईएम बोधगया में BIIPP-2026 हेतु एमओयू।

  2. आईआईएम बोधगया ज्ञान और अनुसंधान भागीदार की भूमिका निभाएगा।

  3. बिहार में औद्योगिक निवेश और विकास को मिलेगा नया आयाम।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और राज्य के उद्योग क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए उद्योग विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बोधगया स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के सहयोग से बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति-2026 (BIIPP-2026) तैयार की जाएगी। इसके लिए उद्योग विभाग और IIM बोधगया के बीच शुक्रवार को समझौता-ज्ञापन (एमओयू) हुआ।

IIM बोधगया निभाएगा नॉलेज और रिसर्च पार्टनर की भूमिका

एमओयू पर उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता और IIM बोधगया की निदेशक डा. विनिता सिंह सहाय ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत IIM बोधगया नीति तैयार करने में नालेज एवं रिसर्च पार्टनर के रूप में सहयोग करेगा।

संस्थान नीति अनुसंधान, दूसरे राज्यों और क्षेत्रों की नीतियों की बेंचमार्किंग, हितधारकों से परामर्श, आर्थिक विश्लेषण और नीति के ड्राफ्ट तैयार करने में विशेषज्ञ सहयोग देगा। इससे नई नीति को शोध और आंकड़ों के आधार पर तैयार करने पर जोर रहेगा।

सभी सेक्टर के लिए ‘मदर पॉलिसी’ होगी नई औद्योगिक नीति

उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने BIIPP-2026 को सभी क्षेत्रों के लिए ‘मदर पालिसी’ बताया। उन्होंने कहा कि नई नीति भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए तैयार होने वाली नीतियों और नीति हस्तक्षेपों की आधारभूमि तैयार करेगी।

इसका उद्देश्य बिहार में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करना, औद्योगिक विकास को गति देना और राज्य के लिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए मजबूत औद्योगिक नीति तैयार करना है।

निवेश के साथ युवा प्रतिभाओं को अवसर से जोड़ने पर जोर

IIM बोधगया की निदेशक डा. विनिता सिंह सहाय ने बिहार की संभावनाओं, जनसांख्यिकीय क्षमता और जैव-विविधता का उल्लेख किया। उन्होंने राज्य में तेजी से उभर रहे अवसरों के साथ युवा प्रतिभाओं को जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया।

नई औद्योगिक नीति में राज्य की क्षमता, उपलब्ध संसाधनों और निवेश की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रणनीति तैयार करने की दिशा में काम होगा। उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के सुझाव भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

IIM की सिफारिशें होंगी सलाहकारी, अंतिम फैसला विभाग का

एमओयू के तहत IIM बोधगया की भूमिका विशेषज्ञ सलाह और शोध तक सीमित रहेगी। नीति की प्राथमिकताएं, राजकोषीय मानदंड, परामर्श का ढांचा और अपेक्षित परिणाम उद्योग विभाग तय करेगा।

IIM की ओर से दी जाने वाली अनुशंसाएं परामर्शात्मक होंगी। BIIPP-2026 का अंतिम निर्णय और अनुमोदन उद्योग विभाग के स्तर से ही किया जाएगा। यानी नीति निर्माण में विशेषज्ञ संस्थान की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, लेकिन अंतिम अधिकार विभाग के पास रहेगा।

उद्योग जगत और हितधारकों की भी ली जाएगी राय

नीति तैयार करने की प्रक्रिया में विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श को भी शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम में हैंडलूम एवं सेरिकल्चर निदेशक डा. विद्यानंद सिंह, एमएसएमई निदेशक अमन समीर, संयुक्त सचिव खंडेकर श्रीकांत कुंडलिक के अलावा राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग और अन्य हितधारक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

नई नीति के जरिए बिहार में निवेश को बढ़ावा देने, औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने और अलग-अलग क्षेत्रों के लिए भविष्य की नीतियों का आधार तैयार करने पर फोकस रहेगा।