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पटना IGIMS अब नहीं अटकेगा आयुष्मान के असली मरीजों का पैसा, न होगा फर्जी दावा

Published: Wed, 30 Sep 2026 07:20 AM (GMT+05:30)

आइजीआइएमएस पटना में आयुष्मान भारत योजना के तहत 13.89 करोड़ के दावों का भुगतान न होने और 45 लाख के फर्जीवाड़े के बाद नई समिति गठित की गई है।

आइजीआइएमएस (फाइल फोटो)

आइजीआइएमएस (फाइल फोटो)

HighLights

  1. आयुष्मान भारत में 13.89 करोड़ के दावे लंबित, 45 लाख का फर्जीवाड़ा।

  2. आइजीआइएमएस ने योजना की निगरानी को नई कार्यसमिति बनाई।

  3. समिति मरीजों के रिकॉर्ड, दावों और भुगतान की समीक्षा करेगी।

जागरण संवाददाता, पटना। आइजीआइएमएस में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत एक वर्ष में दो गड़बड़ियां सामने आई थी। पहला जिन रोगियों का उपचार हुआ, उसकी प्रतिपूर्ति के लिए 13.89 करोड़ का दावा नहीं किया गया। दूसरा, जिन मरीजों का उपचार नहीं हुआ, उनके नाम पर 45 लाख रुपये निकाल लिए गए। 

ऐसे मामले आगे नहीं हो, इसलिए प्राथमिकी के पांच माह बाद आइजीआइएमएस प्रशासन ने व्यवस्था कसनी शुरू की है। मंगलवार को निदेशक प्रो. बिन्दे कुमार ने आयुष्मान भारत योजना को पारदर्शी ढंग से लागू करने व पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए नई कार्यसमिति गठित की। इसमें चिकित्सा, वित्त, फार्मेसी से लेकर तकनीकी विभाग के अधिकारियों तक को शामिल किया गया है। 

सर्जरी के लिए दो नोडल पदाधिकारी 

निदेशक की अध्यक्षता में हर शुक्रवार शाम चार बजे इलाज यह समिति आयुष्मान भारत योजना के लाभुकों के रिकॉर्ड जैसे सिस्टम में नाम दर्ज हुआ कि नहीं, कितना उपचार हुआ, कितने का क्लेम बना, उसका भुगतान हुआ कि नहीं समेत हर पहलू की समीक्षा करेगी। नई व्यवस्था में मुख्य नोडल पदाधिकारी प्रो. संजय कुमार बनाए गए हैं। 

सर्जरी के लिए डॉ. तूलिका सिंह और मेडिसिन के लिए डॉ. अमित कुमार नोडल पदाधिकारी होंगे। चार सहायक नोडल पदाधिकारियों के अलावा मेडिसिन, शल्यक्रिया, क्षेत्रीय चक्षु संस्थान और राज्य कैंसर संस्थान के क्लीनिकल समन्वय अधिकारी भी बनाए गए हैं। उप निदेशक प्रशासन, दोनों चिकित्सा अधीक्षक, अधीक्षण अभियंता व वित्तीय सलाहकार बैठक में स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे।

उपचार कर सरकार से नहीं लिए 13.89 करोड़

प्रधान महालेखाकार (कैग) ने 28 नवंबर 2025 को आयुष्मान भारत योजना के तहत दी गई सेवाओं का प्रतिपूर्ति दावा नहीं करने से 13 करोड़ 89 लाख 47हजार 358 रुपये की राजस्व हानि का मामला उठाया। कैग ने आडिट आब्जर्वेशन पर संस्थान से जवाब मांगा था। 

यह पत्र एक दिसंबर 2025 को आइजीआइएमएस में प्राप्त हुआ था। यह आपत्ति योजना के तहत दी गई सेवाओं के प्रतिपूर्ति दावा प्रक्रिया और संस्थान की वित्तीय निगरानी पर बड़ा सवाल था। इसमें दवा दुकान के अलावा कई अस्पतालकर्मियों की संलिप्तता संदेह के घेरे बताई गई थी।

45 लाख के मामले में कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं

इसके अलावा संस्थान में करीब 45 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी कराई गई है। नियमित आडिट नहीं होने की कमी छिपाते हुए जांच में आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कर्मियों को प्राथमिक दोषी माना गया था। 

आरोप है कि संस्थान के आंतरिक हॉस्पिटल इंफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (एचआईएमएस) में मरीजों से संबंधित रिकॉर्ड के जरिए अनियमितता की गई। मामले में एक मरीज की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई थी। 

शिकायतकर्ता के आयुष्मान कार्ड से राशि का क्लेम किए जाने का रिकार्ड मिला जबकि उसके आइजीआइएमएस में उपचार कराने की बात सामने नहीं आई। इसके बाद संस्थान ने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपित कर्मियों ने मरीजों से अवैध वसूली की और इलाज के दौरान आयुष्मान कार्ड को सॉफ्टवेयर में फर्जी तरीके से अपलोड कर क्लेम पास कराया।

यह बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य आयुष्मान कार्डधारी रोगियों को त्वरित व समुचित उपचार उपलब्ध कराना है। कैग ने जो आपत्ति उठाई थी, उसका जवाब भेज दिया गया था। वहीं, 45 लाख रुपये की वसूली करने के साथ चार नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी कराई गई थी। कुछ कर्मचारियों के खिलाफ प्रक्रिया चल रही है।- डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा, उप निदेशक आइजीआइएमएस

अब इन बिंदुओं पर होगी निगरानी

  • आयुष्मान मरीज के भर्ती से डिस्चार्ज तक रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा।
  • इलाज के बाद हर पात्र सेवा का समय पर क्लेम हो रहा है या नहीं, देखा जाएगा।
  • एचआईएमएस और आयुष्मान पोर्टल के आंकड़ों में अंतर तो नहीं है?
  • मरीज के नाम पर क्लेम से पहले वास्तविक उपचार का सत्यापन कौन करेगा?
  • आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मियों की गतिविधियों की निगरानी सुनिश्चित करना।
  • लंबित क्लेम और भुगतान का नियमित वित्तीय मिलान करना।

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