IGIMS में जमकर हुआ बवाल: MBBS छात्र से मारपीट के बाद भड़के छात्र, कर्मचारी-गार्डों की पिटाई
पटना के IGIMS में मंगलवार को ओपीडी के दौरान एमबीबीएस छात्र से मारपीट के बाद जमकर हंगामा हुआ। आक्रोशित छात्रों ...और पढ़ें

आइजीआइएमएस ओपीडी में एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र को पीटने वाले कर्मचारी को घेरे अन्य छात्र। सीसीटीवी फुटेज
HighLights
एमबीबीएस छात्र से मारपीट के बाद IGIMS में हंगामा।
आक्रोशित छात्रों ने कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों की पिटाई की।
एक सुरक्षाकर्मी निलंबित, छात्रों ने हड़ताल की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में मंगलवार दोपहर ओपीडी के दौरान जमकर हंगामा हुआ।
एमबीबीएस फाइनल ईयर के एक छात्र के साथ कथित मारपीट के बाद मेडिकल छात्र भड़क गए और कर्मचारी व सुरक्षाकर्मियों की पिटाई कर दी। करीब दो घंटे तक संस्थान में अफरातफरी का माहौल बना रहा।
घटना के बाद छात्रों ने संस्थान के निदेशक प्रो. बिन्दे कुमार को लिखित शिकायत देकर दोषी कर्मचारी और गार्डों पर कार्रवाई की मांग की।
छात्रों ने चेतावनी दी कि कार्रवाई नहीं होने पर वे हड़ताल करेंगे। निदेशक के निर्देश पर एक सुरक्षाकर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
अपमान पर एकजुट छात्रों ने बाद में कर्मचारी व गार्डों को पीटा
जानकारी के अनुसार, 2022 बैच के एमबीबीएस फाइनल ईयर के छात्र सुधीर कुमार अपने स्वजन को न्यूरो सर्जरी ओपीडी में दिखाने पहुंचे थे।
छात्र का आरोप है कि मरीज की हालत गंभीर थी। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सुरेंद्र दास को अपना परिचय देते हुए जल्द डॉक्टर से मिलवाने का अनुरोध किया। काफी देर तक नंबर नहीं आने पर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।
आरोप है कि विवाद बढ़ने पर कर्मचारी ने छात्र के साथ मारपीट की। छात्र ने आरोप लगाया कि उसे बाल पकड़कर पीटा गया और गार्ड रूम में ले जाकर दीवार से सिर टकरा दिया गया। इस दौरान कुछ अन्य गार्डों ने भी उसके साथ मारपीट की।
कार्रवाई नहीं होने पर हड़ताल की चेतावनी
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र मौके पर पहुंच गए। आक्रोशित छात्रों ने कथित रूप से कर्मचारी और गार्डों की पिटाई कर दी। बाद में सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।
छात्रों का कहना है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। वहीं रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के अध्यक्ष डॉ. रजत कुमार ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मेडिकल छात्रों के समर्थन की बात कही।
उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से विवाद बढ़ा। हालांकि, संस्थान के निदेशक और मुख्य प्रवक्ता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका।
छात्रों के अनुसार प्रशासन ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
