पटना। आज की युवा पीढ़ी पढ़-लिखकर कॅरियर की राह पकड़ने के बाद अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुट जाती है। वहीं वर्तमान समय में कुछ लोग इसके अपवाद भी हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आएजीआइएमएस) में बतौर इंटर्न कार्यरत डॉ. शिवानी की, जो खुद को मिलने वाली राशि गरीब व जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए दान कर देती हैं। उनके इस जज्बे से प्रभावित होकर संस्थान के निदेशक ने शिवानी से मिलने वाली राशि को 'शिवानी पुअर स्पेशल रिलीफ फंड' का नाम दे दिया है।

मूलत: जमुई की रहने वाली शिवानी यह कार्य पिछले एक साल से कर रही हैं। अस्पताल में आए मरीजों की स्थिति देखकर राशि के लिए अनुशंसा करती हैं। फंड में अब तक दो लाख रुपये जमा हो चुके हैं। इसके अलावा वह इंटर्नशिप की ड्यूटी के बाद गरीब मरीजों की सेवा में जुटी रहती हैं।

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: बचपन से थी डॉक्टर बनने की इच्छा :

डॉ. शिवानी ने बताया कि उनके रिश्तेदारों में भी कोई डॉक्टर नहीं है। कैसे डॉक्टर बनने की इच्छा जागृत हुई, इस बारे में बताने लगीं कि बचपन में वह एक मेले में गई थीं। वहां उसने खिलौने में डॉक्टर की किट खरीदी। तभी से उसके जेहन में एक बात घर कर गई कि उसे बड़े होकर डॉक्टर बनना है। 2004 में जमुई में हाई स्कूल और 2006 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुट गई। 2009 तक प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। पिता सुधीर कुमार केसरी व मां मीना देवी के सहयोग से वह 2010 में तैयारी के लिए दिल्ली गई। 2011 में एमबीबीएस नामांकन परीक्षा में रैंक कम आने के कारण डेंटल कोर्स मिला। ज्वाइन करने की बजाय फिर से तैयारी शुरू की और 2012 में एमबीबीएस के लिए चयन हुआ। इसके बाद आइजीआइएमएस में नामांकन लिया।

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: वार्ड ड्यूटी के दौरान महसूस हुआ मरीजों का दर्द :

डॉ. शिवानी बताती हैं कि बचपन से ही डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने की इच्छा थी। एमबीबीएस के दूसरे वर्ष में वार्ड ड्यूटी ज्वाइन करने के बाद मरीजों के दर्द का अहसास हुआ। आइजीआइएमएस में कई मरीज पैसे न होने के कारण बिना इलाज के घर लौट रहे थे। यह देखकर मन काफी दुखी हुआ। इसकी चर्चा अपने माता-पिता से की। फाइनल परीक्षा के बाद इंटर्नशिप के दौरान हर महीने मिलने वाले 17 हजार रुपये नहीं लिए। इस राशि को निदेशक के पास जमा कराया और उनसे इस राशि से गरीबों का इलाज कराने का आग्रह किया। इसके बाद निदेशक ने राशि को फंड का नाम दे दिया।

: पेंटिंग की हैं शौकीन :

डॉ. शिवानी को बचपन से ही पेंटिंग का शौक है। वह बताती हैं कि जब समय मिलता है, वह पेंटिंग बनाती हैं।

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Posted By: Jagran