यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
एड्स की बीमारी अब नए तरीकों से फैल रही, महाराष्ट्र और यूपी के बाद बिहार में हैं सबसे अधिक मरीज
जानलेवा बीमारी एचआइवी यानी एड्स का प्रसार देह व्यापार के धंधे की बजाय नए तरीकों से फैल रही है। चिंता ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पटना। पूरे देश के साथ ही बिहार में भी एचआइवी-एड्स संक्रमण फैलने का माध्यम अब बदल चुका है। पहले असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण सबसे अधिक लोग एचआइवी की चपेट में आते थे, लेकिन अब यह वजह पीछे छूट चुकी है। इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि बिहार में एचआइवी संक्रमण के मामलों का कम नहीं होना। इस गंभीर संक्रमण के मामले में बिहार का स्थान महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के बाद तीसरा है। स्वास्थ्य संगठन सर्वे के जरिए इसकी पड़ताल करते हैं कि संक्रमण आखिर फैल कैसे रहा है।
नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गेनाइजेशन (नाको) की रिपोर्ट के मुताबिक अब इंजेक्शन और समलैंगिकता के कारण संक्रमित होने की दर बढ़ी है। इंजेक्शन से संक्रमित होने की दर 2010 में 4.5 गुना हो गई थी हालांकि, 2017 में यह फिर एक प्रतिशत से कम पर आ गई थी। वहीं समलैंगिकता के कारण एचआइवी संक्रमण दर 2010 में 4.2 प्रतिशत था जो कि 2017 में घटकर 3.6 हो गया।
2010 के बाद संक्रमितों की संख्या तो घटी, लेकिन चिंता अब भी
नाको के अनुसार अब भी इन्हीं दो कारणों यानी एक इंजेक्शन से कई लोगों के ड्रग्स लेने या अन्य संक्रमित सिरिंज के प्रयाेग और समलैंगिकता के कारण ही अधिकतर लोग एचआइवी की चपेट में आ रहे हैं। 2010 के बाद प्रदेश में एचआइवी संक्रमितों की संख्या में भले ही 27 प्रतिशत तक की कमी आई है लेकिन कुल संक्रमितों के मामले में यह महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश के बाद तीसरे नंबर पर है। प्रदेश में संक्रमण दर 0.17 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 0.22 प्रतिशत से कम है।
यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डा. एसएसएस रेड्डी ने पिछले दिनों बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के वार्षिक सम्मान समारोह सह मीडिया संवेदीकरण कार्यक्रम में एचआइवी संक्रमण से जुड़ी कई जानकारियां साझा की थीं। बिहार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का कहना है कि 2025 तक एचआइवी-एड्स को सीमित करने और 2030 तक देश से खात्मा करने के केंद्र सरकार के संकल्प को सफल बनाने के लिए राज्य में जांच, इलाज के साथ नए रोगियों की संख्या कम करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि लोग शक होने पर डर या झिझक के कारण जांच नहीं कराते। उनसे अपील है कि वे जांच कराएं क्योंकि समय पर पहचान होने पर यदि समय पर दवाएं ली जाएं तो संक्रमित सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की तरह लंबा जीवन जी सकता है। ऐसे कई लोगों को मैं जानता भी हूं। एचआइवी-एड्स के खात्मे के लिए युवाओं को जागरूक करना जरूरी है।
| संक्रमण का तरीका और वर्ष | 2003 | 2007 | 2010 | 2017 |
| देह व्यापार | 4.8 | 3.4 | 2.3 | 0.4 |
| इंजेक्शन | 00 | 0.6 | 4.5 | 0.7 |
| समलैंगिक संबंध | 1.6 | 0.3 | 4.2 | 3.6 |
बिहार में एचआइवी के आंकड़े (नाको की 219 की रिपोर्ट)
| इंडीकेटर | पुरुष | महिला | कुल |
| नए संक्रमित | 4736 | 3309 | 8044 |
| एड्स से मौत | 1551 | 778 | 2328 |
| संक्रमण दर (15-49 वर्ष) | 0.20 | 0.15 | 0.18 |
| कुल संक्रमित | 78540 | 55946 | 134480 |
बच्चे एचआइवी संक्रमित, 3753, 3563, 7316
