पटना, जागरण संवाददाता। प्रदेश में हर वर्ष दिसंबर में इतने हृदय रोगी (Heart Patients) अस्पताल पहुंचते हैं कि बेड कम पड़ जाते हैं। अबतक इसका कारण ठंड के कारण रक्त नलिकाओं के सिकुड़ने के कारण आक्सीजन आपूर्ति के लिए हृदय को अधिक कार्य करने से ब्लड प्रेशर बढ़ने को माना जाता था। डाक्टरों के अनुसार इसका दूसरा कारण इस मौसम में बढ़ा वायु प्रदूषण भी है। पीएमसीएच के हृदय रोग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डा. यूएन सिंह ने आइसीयू में भर्ती हुए 500 रोगियों के क्लीनिकल अध्ययन (Clinical Study) में पाया कि इसमें उन लोगों की संख्या अधिक थी, जो अधिक वायु प्रदूषण वाले क्षेत्रों में रहते हैं।

पांच सौ रोगियों पर किया गया अध्‍ययन

पहले अधिक वायु प्रदूषण वाले क्षेत्र में रहने वाले अधिकतर मरीज सांस, फेफड़े या निमोनिया के मरीज होते थे और 10 प्रतिशत को ही हृदय की समस्या होती थी। अब इनकी संख्या 25 प्रतिशत से अधिक हो गई है। बिना धूम्रपान के भी लोगों में ऐसे दुष्प्रभाव दिख रहे हैं जैसे एक दिन में दस सिगरेट पीने वालों में होते हैं।

बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा बनाता डायबिटिक

डा. यूएन सिंह ने बताया कि वायु प्रदूषण अधिक होने पर बड़ी मात्रा में सांस के साथ जहरीले रसायन व सूक्ष्म कण शरीर में पहुंच जाते हैं। इससे रक्त नलिकाओं में सूजन व जलन होने के साथ रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इससे अचानक बीपी बढ़ता है और हृदयाघात की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। यही कारण है कि आइसीयू में भर्ती हुए हृदय राेगियों में ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक थी जो कि अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण वाली जगहों पर रहते हैं। वायु प्रदूषण के साथ शरीर में पहुंचे सूक्ष्म व जहरीले कण पैंक्रियाज में पहुंच कर शुगर नियंत्रित करने वाली इंसुलिन का स्राव करने वाली बीटा कोशिकाओं को नष्ट करते हैं। यही कारण है कि अधिक वायु प्रदूषण वाली जगहों में रहने वालों में मधुमेह रोगियों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है।

हृदय रोगियों की संख्या बढ़ने के कारण बदले

पहले आहार में गड़बड़ी व शारीरिक श्रम के अभाव के कारण 56 प्रतिशत और उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्राल व मधुमेह के कारण 54 प्रतिशत लोग हृदय रोग की चपेट में आते थे। 1990 के बाद इन कारणों के साथ 25 प्रतिशत लोग प्रदूषण और 30 प्रतिशत लोग अत्यधिक तनाव के कारण हृदय रोगी हो रहे हैं। 30 वर्षों में 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों में हृदय रोगों का प्रकोप तीन गुना बढ़ा है। कोरोनरी हृदय रोग की समस्या अन्य देशों की तुलना में 18 प्रतिशत तक अधिक है। पश्चिमी देशों की तुलना में देश में चार गुना अधिक युवाओं को हृदयाघात हो रहा है।

घंटों लगातार बैठ कर काम करना नुकसानदेह

काम के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवा दिन-रात आक्रामक रूप से काम करते हैं। अधिक कार्य बोझ, भविष्य की अनिश्चितता व शौक पूरा नहीं कर पाने से तनाव बढ़ता है और जीवन सीमित हो रहा है। 4 से 5 घंटे लगातार बैठकर काम करने का सिगरेट पीने जैसा दुष्प्रभाव हो रहा है। हृदयाघात पीड़ित 40 वर्ष से कम उम्र के अधिकतर मरीज सिगरेट पीते थे। भारत में पश्चिमी देशों की तुलना में 10 वर्ष पहले लोगों को हृदयाघात हो रहा है। साथ तनाव के कारण वे उम्र से अधिक बुजुर्ग दिखने लगते हैं। अस्वास्थ्यकर खाना समस्या को और गंभीर कर देता है।

Edited By: Vyas Chandra

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