पटना, जेएनएन। बिहार के पूर्व सीएम और हम, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी आजकल महागठबंधन से खासे नाराज चल रहे हैं। वीआइपी के मुकेश सहनी से करीबी होने के बाद मांझी ने अब महागठबंधन को अल्टीमेटम देकर कहा है कि इस साल दिसंबर तक अगर महागठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमेटी नहीं बनी तो हम भी सोचेंगे और तीसरा फ़्रंट बनाने की तैयारी करेंगे। 

जीतनराम मांझी के पैंतरे पर कांग्रेस ने पलटवार करते हुए तंज कसा है और कहा है कि शर्तों को रखकर तालमेल नहीं किया जाता है। कांग्रेस नेता कौकब कादरी और समीर कुमार ने कहा कि लालसा पूरी करने के लिए बार-बार फैसले बदलते रहते हैं लोग। गठबंधन में रहकर इधर -उधर की बातें करना गलत है।

सोमवार को जीतनराम मांझी ने बयान दिया है कि मुझे विधानसभा के उपचुनाव में धोखा दिया गया। पहले से बातें तय होने के बाद भी मेरे ऊपर ही फैसला थोपा गया। अगर हम उपचुनाव में नाथनगर की सीट पर मिलकर लड़ते तो वहां भी हमारी ही जीत होती।

ओवैसी की पार्टी के साथ आने के सवाल पर मांझी ने कहा कि बिहार में दलित-मुस्लिम एक होकर सियासत करेंगे तभी कल्याण है, वरना किसी का कल्याण नहीं होगा। ओवैसी के साथ आने के सवाल पर मांझी ने कहा कि ये ओवैसी के लोग जानें कि साथ आएंगे या नहीं। लेकिन हमने एक कॉल दे दिया है कि दलित-मुस्लिम को साथ आकर ही सियासत करनी चाहिए।

इधर, महागठबंधन से अलग होने की मांझी की घोषणा के साथ ही बिहार में बीजेपी के कई नेताओं का उनसे मिलने-जुलने का सिलसिला बढ़ गया है। गुरुवार को बीजेपी के एमएलसी संजय पासवान ने मांझी से मुलाकात की थी, फिर इसके बाद शुक्रवार को बीजेपी विधायक रामप्रीत पासवान भी उनके मिलने पहुंचे थे। हालांकि इस दौरान दोनों के बीच क्या बातें हुईं इसको लेकर कुछ खुलासा नहीं हुआ है?

Posted By: Kajal Kumari

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