पटना [जेएनएन]। देश के विभिन्न चिड़ियाघरों में शेर, हाथी, गैंडा, चिम्पैंजी, बारहसिंगा, हिरन आदि को बार-बार क्यों सर्दी-जुकाम और बुखार होता है, वे अक्सर क्यों गुस्सा हो जाते हैं। खाने-पीने में ठीक से रुचि क्यों नहीं लेते, एक्टिव हैं या नहीं। उन्हें कोई ऐसी बीमारी तो नहीं जो बार-बार परेशान करती है। ये सारी जानकारियां जल्द ही एक क्लिक पर सामने होंगी।

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने जियोलॉजिकल इंफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के तहत स्पेसीज-360 नामक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसमें देश के 32 चिड़ियाघरों में रह रहे प्रमुख वन्य जीवों से जुड़ी हर जानकारी उपलब्ध रहेगी। संजय गांधी जैविक उद्यान के चिकित्सकों को इसका प्रशिक्षण देने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के क्षेत्रीय संयोजक मोईन अहमद खुद आ रहे हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में पूर्वी भारत के चिड़ियाघरों के चिकित्सक भी भाग लेंगे।

शिविर में सॉफ्टवेयर में सारी जानकारी अपडेट करने की विधि बताई जाएगी। 32 चिड़ियाघरों को इस सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा। किस चिड़ियाघर में वन्य प्राणी की संख्या कितनी है। रहन-सहन, खानपान की विस्तृत जानकारी इसमें उपलब्ध रहेगी। डाटा बैंक का प्रमुख रूप से इस्तेमाल वन्य प्राणियों के स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए होगा। सभी पशु चिकित्सक इस सॉफ्टवेयर में नई जानकारियां जोड़ते रहेंगे। संजय गांधी जैविक उद्यान में 12-13 फरवरी को आयोजित हो रहे प्रशिक्षण शिविर में पूर्वी भारत के नंदनकानन, दार्जिलिंग, कोलकाता, असम, राउरकेला, रांची और टाटा जू के चिकित्सक भाग लेंगे। स्थानीय चिड़ियाघर के चिकित्सक डॉ. समरेंद्र बहादुर सिंह और आरके पांडे भी प्रशिक्षण लेंगे।

पटना जू के कर्मचारियों ने बताया कि डाटा बैंक बनना इस लिहाज से उचित रहेगा कि मानो यहां के सृष्टि नामक जिराफ का जन्म कब हुआ? किस चिड़ियाघर से उसे यहां लाया गया। आने के बाद वह क्यों गुमसुम हो गया, बीमार लगने लगा डॉक्टरों को समझ में नहीं आया था, जब उस जू से जानकारी ली गई जहां से वह यहां आया था और ट्रीटमेंट हिस्ट्री सामने आई तो अब वह चैतन्य है।

Posted By: Jagran