पटना, जेएनएन। इसे इत्तेफाक कहें या कुदरत का खेल जिस फूल से स्निग्धा की शादी का मंडप सजना था उस फूल से स्निग्धा की अर्थी सजी। शनिवार को उसकी तिलक  की रस्म अदायगी हुई थी। सोमवार को शादी होनी तय थी। इसके लिए मंडप और घर को सजाने को काफी मात्रा में फूल मंगाए गए थे।

स्निग्धा की मौत के बाद जब उसका शव शास्त्रीनगर थाने के पटेल नगर स्नेही पथ लाया गया तो माहौल बदल चुका था। जश्न में इस्तेमाल होने वाले फूल अर्थी पर दिख रहे थे। जैसे ही फूलों से सजी स्निग्धा की अर्थी घर से निकली मुहल्ले वालों के आंखों से आंसू बहने लगे। सभी घटना से स्तब्ध थे।

फफक कर बोले पिता, परवरिश में रह गई कमी

स्निग्धा की मौत की खबर सुनते परिजन सकते में आ गए। गीत और शगुन में हंसते-खिलखिलाते चेहर उदासी में बदल गए थे। रोने की आवाजें जोर-जोर से गूंजने लगीं। जो लोग बधाई देने आए थे वे सांत्वना देने लगे। पिता के मुंह से फफक-फफक कर एक बात बार-बार निकल रही थी, मेरी परवरिश में ही कहीं कमी रह गई। सूचना के बाद मुख्य सचिव दीपक कुमार, जिलाधिकारी पटना कुमार रवि सहित कई वरीय अधिकारी और सेवानिवृत्त अधिकारियों का उमाशंकर सुधांशु के घर आना-जाना लगा रहा। सभी स्निग्धा के पिता को ढांढ़स बंधा रहे थे।

Posted By: Akshay Pandey

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