पटना। लालच के आगे रिश्तों का खून बहने में समय नहीं लगता। पैसे के आगे कई बार अपनों का भी ईमान डोल जाता है। दूसरों पर अपनों से ज्यादा विश्वास करने का नतीजा बुरा होता है। जब रिश्तों में पैसे के लेकर लालच उत्पन्न होता है तो मानवीय रिश्तों को टूटने में वक्त नहीं लगता। कुछ ऐसी ही कहानी शुक्रवार को कालिदास रंगालय में देखने को मिली। वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल कुमार मुखर्जी की जयंती पर 29वें पटना थियेटर फेस्टिवल के मौके पर बिहार आर्ट थियेटर की ओर से भीष्म साहनी लिखित एवं शिल्पी कुमारी के नाट्य रूपांतरण एवं सुमन कुमार के निर्देशन में 'खून का रिश्ता' का मंचन कर कलाकारों ने सभी को सोचने पर विवश कर दिया।

ये थी कहानी -

मंगलसेन एक सेवानिवृत्त फौजी है। जो अपने दूर के भाई लालाजी के यहां रहता है। फौजी लालाजी के परिवार को अपना मानता है और उन लोगों की खुशियों के लिए हर संभव मदद करता है। लेकिन वे लोग उसे बहुरूपिया समझते हैं। फौजी किराया लेने का काम ढंग से नहीं करता और इसके कारण लालाजी उसे डांट भी सुनाता है। वही फौजी लालाजी के रिश्तेदार की घर शादी में जाने का मन रखता है, लेकिन उसे जाने से रोक दिया जाता है। लालाजी सगाई में जाते हैं वही एक चम्मच के कारण खून का रिश्ता भी तार-तार हो जाता है। बाद में पूरे परिवार को अपनी भूल का अहसास होता है। मंच पर अभिषेक कुमार, रेणु सिन्हा, सुभद्रा सिंह, बिकेस साह, डॉ. रागिनी सिन्हा, विकास कुमार मिश्रा, शुभम सिंह, उपेंद्र कुमार, सुमित आर्य, शिल्पी कुमारी आदि ने उम्दा प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीता।

Posted By: Jagran

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