नलिनी रंजन, पटना: मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद संक्रमण से रोशनी गंवाने वाले जिन 15 मरीजों का उपचार आइजीआइएमएस में चल रहा है। उनकी कल्चर जांच रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में मरीजों की आंखों में घातक ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया और कैंडिडा फंगस की पुष्टि हुई है। क्षेत्रीय चक्षु संस्थान (आरआइओ) प्रमुख डा. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि आंखों में संक्रमण के शिकार मुजफ्फरपुर से आए इन मरीजों को एक विशेष वार्ड में भर्ती किया गया है। 13 बेड का वार्ड फुल होने के बाद दो मरीजों को आंख विभाग के मुख्य वार्ड में रखा गया है। इसमें पहले दिन भर्ती किए गए नौ मरीजों की कल्चर जांच रिपोर्ट में ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया एवं कैंडिडा फंगस की पुष्टि हुई है। यह संक्रमण लिक्विड से हो सकता है। दरअसल मोतियाबिंद के आपरेशन के दौरान आंखों की सफाई के लिए बैलेंस साल्ट साल्यूशन फ्लूड का प्रयोग किया जाता है। यह स्टरलाइज्ड पैक में आता है। 

संस्थान के नेत्र डाक्टरों के अनुसार ग्राम निगेटिव बैक्टीरिया काफी एग्रेसिव होता है। इसमें आंखों का तुरंत उपचार नहीं होने पर रोशनी जाने के साथ संक्रमण को रोकने के लिए आंख निकालने तक की नौबत आ जाती है। देरी होने पर अनहोनी हो सकती है। वहीं, कैंडिडा फंगस लंबे समय के बाद घातक रूप लेता है और आंखों की रोशनी तक छीन लेता है।  

आज से दोबारा होगी जांच

आइजीआइएमएस में भर्ती मुजफ्फरपुर के आंखों के मरीजों की सोमवार को फालोअप जांच होगी। एक-एक मरीजों को देखा जाएगा कि अब तक दी गईं एंटीबायोटिक दवाओं का क्या असर है। इसके अतिरिक्त वैशाली के भगवानपुर थाना क्षेत्र के जगदीश राम एवं मुजफ्फरपुर के मुशहरी थाना क्षेत्र के मोमिनपुर निवासी मो. जुमराती की विट्रो रेटिनल सर्जरी और कार्निया प्रत्यारोपण की भी जांच की जाएगी। खगडिय़ा जिले के अलौली थाना क्षेत्र के हरीपुर निष्ठा की भागमती देवी की विट्रो रेटिनल सर्जरी के बाद की प्रोग्रेस देखी जाएगी। टीम का नेतृत्व डा. विभूति प्रसन्न सिन्हा व डा. नीलेश मोहन कर रहे हैं। टीम में रेटिना विशेषज्ञ डा. अभिषेक आनंद, डा. शिवांगी, डा. ज्ञान भाष्कर, डा. राखी कुसुमेश व अन्य शामिल हैं।

Edited By: Akshay Pandey