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ट्रेन छोड़ ट्रक से मंगाए बोल्डर, गोपालगंज के तीन बाढ़ नियंत्रण कार्यों में खजाने को 3.56 करोड़ की चपत

Published: Wed, 19 Aug 2026 08:00 AM (IST)

गोपालगंज में बाढ़ नियंत्रण के तीन कार्यों में बोल्डर ढुलाई में 3.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ, क्योंकि 70% ...और पढ़ें

70 प्रतिशत बोल्डर सड़क से आए

70 प्रतिशत बोल्डर सड़क से आए

HighLights

  1. गोपालगंज बाढ़ कार्यों में बोल्डर ढुलाई पर 3.56 करोड़ अतिरिक्त खर्च।

  2. सलेहपुर-टंडसपुर छरकी में कटाव निरोधक कार्य हेतु बोल्डर ढुलाई पर 2.8 करोड़

  3. सारण तटबंध में नए तटबंध के निर्माण के लिए बोल्डर ढुलाई पर 4.54 करोड़ खर्च

राज्य ब्यूरो, पटना। यह गबन नहीं, लेकिन गड़बड़झाला जरूर है। जल संसाधन विभाग की इस कार्यप्रणाली पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने सवाल उठाए हैं। मामला गोपालगंज बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल से जुड़ा है, जहां कटावरोधी कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश के चुनार से बोल्डर मंगाए गए।

70 प्रतिशत बोल्डर सड़क से आए, रेलवे से था सस्ता

कैग के अनुसार कुल बोल्डर में 70 प्रतिशत की ढुलाई सड़क मार्ग से की गई, जबकि रेलवे से परिवहन अपेक्षाकृत सस्ता था।

केवल 30 प्रतिशत बोल्डर ट्रेन से मंगाए गए। सड़क मार्ग से अधिक भाड़ा लगने के कारण सरकारी खजाने पर 3.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

तीन बाढ़ नियंत्रण कार्यों में 11.03 करोड़ खर्च

बोल्डर की ढुलाई तीन अलग-अलग बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए की गई। सलेहपुर-टंडसपुर छरकी में कटाव निरोधक कार्य के लिए ढुलाई पर 2.8 करोड़ रुपये खर्च हुए।

सारण तटबंध में नए तटबंध के निर्माण के लिए 4.54 करोड़ और बंधौली-फैजुल्लाहपुर जमींदारी बांध को ऊंचा करने के लिए 4.31 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

42.50 करोड़ का अनुबंध, 41.40 करोड़ में पूरा हुआ काम

तीनों बाढ़ नियंत्रण कार्यों के लिए कुल 42.50 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था। कार्यों को 41.40 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया गया।

इन कार्यों के निष्पादन के दौरान कुल 22,543.75 घन मीटर बोल्डर का उपयोग किया गया।

30 प्रतिशत ट्रेन से, बाकी 70 प्रतिशत सड़क मार्ग से

कुल उपयोग किए गए बोल्डर में से 6,763.48 घन मीटर यानी 30 प्रतिशत की ढुलाई रेलवे के माध्यम से हुई।

शेष 15,780.27 घन मीटर यानी 70 प्रतिशत बोल्डर सड़क मार्ग से लाए गए। इसी परिवहन माध्यम के अंतर ने अतिरिक्त भुगतान का मामला खड़ा किया।

रेल का भाड़ा कम, फिर सड़क मार्ग को क्यों दी गई प्राथमिकता?

कैग की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे से बोल्डर परिवहन की दर 2,933.08 रुपये से 3,407.45 रुपये प्रति घन मीटर तक थी।

वहीं सड़क मार्ग से परिवहन की दर 5,063.91 रुपये से 5,410.48 रुपये प्रति घन मीटर तक रही। ऐसे में सड़क के बजाय रेलवे से अधिक बोल्डर लाना सस्ता पड़ता।

सड़क से ढुलाई पर 3.56 करोड़ का अनुचित भुगतान

कैग ने कहा कि 15,780.27 घन मीटर बोल्डर की सड़क मार्ग से ढुलाई के कारण कुल 3.56 करोड़ रुपये का अनुचित भुगतान हुआ।

यदि कम लागत वाले माध्यम को प्राथमिकता दी जाती तो सरकारी खजाने पर यह अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।

कार्यपालक अभियंता ने समय पर काम पूरा करने का दिया तर्क

कार्यपालक अभियंता ने अपने जवाब में कहा कि रेलवे से बोल्डर मंगाकर कार्यों को समय पर पूरा करना संभव नहीं था, क्योंकि इसके लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़तीं। हालांकि कैग ने इस जवाब को संतोषजनक नहीं माना।

कैग बोला- देरी का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं मिला

कैग के अनुसार ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे यह साबित हो सके कि ट्रेन से बोल्डर लाने पर कार्यों में देरी होती।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि तीनों कार्यों में 30 प्रतिशत बोल्डर रेलवे से ही लाए गए थे।

जब 30 प्रतिशत ट्रेन से आ सकते थे, तो बाकी क्यों नहीं?

कैग ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि जब तीनों कार्यों में 30 प्रतिशत बोल्डर रेलवे से लाना संभव था, तो शेष मात्रा की ढुलाई भी रेल मार्ग से की जा सकती थी। इस कारण कार्यपालक अभियंता का तर्क स्वीकार नहीं किया गया।

वित्तीय नियम में कम खर्च वाले विकल्प को प्राथमिकता

बिहार वित्तीय नियमावली के अनुसार प्रत्येक अधिकारी को सार्वजनिक धन खर्च करते समय उतनी ही सतर्कता बरतनी चाहिए, जितनी एक विवेकशील व्यक्ति अपने धन के खर्च में करता है। कम लागत वाले विकल्प को प्राथमिकता देना भी इस व्यवस्था का हिस्सा है।

जल संसाधन विभाग के नियम में भी लागत तुलना का प्रावधान

जल संसाधन विभाग के नियम के अनुसार सड़क और रेल मार्ग से परिवहन लागत की गणना की जानी चाहिए।

प्राक्कलन तैयार करते समय दोनों माध्यमों में जिस विकल्प की दर कम हो, उसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।