राज्य ब्यूरो, पटना : बिहार के विश्वविद्यालयों में शोध कार्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार अब पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को हर माह दस हजार रुपये की फेलोशिप देगी। यह फेलोशिप नेट पास करने वाले उन विद्यार्थियों को मिलेगी, जिन्हें यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से फेलोशिप नहीं मिली है। फेलोशिप का लाभ लेने के लिए पीएचडी में पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा विभाग में आनलाइन आवेदन करना होगा। उच्च शिक्षा निदेशालय की टीम प्राप्त आवेदनों की जांच और फिर सत्यापन कराने के बाद फेलोशिप देने की अनुशंसा करेगी।

प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा

शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक डाक्टरल फेलोशिप का नाम से एक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें फेलोशिप देने के लिए मानदंड भी निर्धारित किया जा रहा है। फेलोशिप नेट परीक्षा पास करने वाले बिहार के उन विद्यार्थियों को दी जाएगी, जिन्हें यूजीसी से फेलोशिप नहीं मिलती है।

शोध प्रस्ताव बिहार के विश्वविद्यालयों में नामांकित होना चाहिए

पीएचडी करने हेतु पंजीयन कराने वाले शोधार्थियों के सामने शर्त यह होगी कि उनकी पीएचडी का शोध प्रस्ताव बिहार के विश्वविद्यालयों में नामांकित होना चाहिए। तीन साल तक चयनित शोधार्थियों को प्रतिमाह फेलोशिप की राशि मिलेगी। 

प्रति वर्ष दो हजार शोधार्थी कराते हैं पीएचडी में पंजीयन

मिली जानकारी के मुताबिक राज्य के विश्वविद्यालयों में प्रत्येक वर्ष करीब दो हजार शोधार्थी पीएचडी के लिए पंजीयन कराते हैं। इनमें औसतन 658 महिला शोधार्थी होती हैं। इनमें से अधिसंख्य शोधार्थियों को यूजीसी की फेलोशिप नहीं मिलती है। प्रारंभ में शिक्षा विभाग फेलोशिप का दायरा सीमित रखने पर विचार कर रहा है। इसके तहत शोध का विषय और महत्ता भी निर्धारित की जाएगी। हाल में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में फेलोशिप देने से संबंधित निर्देश दिया गया था।

Edited By: Akshay Pandey

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