मृत्युंजय मानी, पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना जू में जिराफ, सांभर और मणिपुर संगाई डीयर की तस्वीर कैद करने में अब जाली बाधक नहीं बनेगी। तीनों के केजों में बड़ा शीशा (ग्लास) लगने जा रहा है। इसके साथ ही जिराफ केज का विस्तार हो रहा है। सांभर और मणिपुर संघाई डीयर को नया केज मिलेगा। इनके लिए केज बनकर तैयार है।

अफ्रीका के जंगलों में पाया जाने वाला जिराफ का कुनबा संजय गांधी जैविक उद्यान में बढ़ते जा रहा है। इनकी संख्या को देखते हुए अब केज छोटा पड़ गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से केज में नयी जाली लगाई जा रही है। इसके साथ ही जिराफ केज के विस्तार की योजना पर काम शुरू हो गया है। सांभर और नीलगाय को पुराने केज से हटाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। जिराफ को अब दर्शक और नजदीक से देख पाएंगे। इसका विस्तार गैंडा केज तक किया जा रहा है।

स्थानीय चिड़ियाघर में 50 सांभर हैं। इन्हें शेर पूंछ बंदर केज के सामने नये केज में रखा जा रहा है। इसके केज में भी ग्लास लगाए जाएंगे। इसके बगल में मणिपुर संगाई डीयर का केज बना है। स्थानीय चिड़ियाघर में जिराफ की संख्या छह है। 2007 में तीन जिराफ अमेरिका के सेंट डियागो जू से लाए गए थे। अब पटना में जन्मे जिराफ देश के कई चिड़ियाघरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। जिराफ की मांग देशभर में है। पटना चिड़ियाघर में जिराफ का सफल प्रजनन हो रहा है। यह जमीन पर रहने वाला सबसे ऊंचा जानवर है। इसकी खूबसूरती बच्चों को काफी आकर्षित करती है।

संगाई डीयर मणिपुर राज्य का राजकीय जीव है तथा संकटग्रस्त की श्रेणी में है। असम के गुवाहाटी जू से आधा दर्जन संगाई डीयर मंगाए जा रहे हैं। उनके आने के पहले केज बनकर तैयार हो गया है। इसके सिंग आकर्षक होते हैं, जिसकी कई शाखाएं निकली रहती हैं। स्थानीय चिड़ियाघर में हिरण प्रजाति के सांभर की संख्या करीब 50 है। इसके लिए नया केज बनकर तैयार हो गया है। अब इसका स्थानांतरण नये केज में करना है। सांभर हिमालय पर्वत के दक्षिण ढ़लान वाले क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।

वर्जन

जिराफ की संख्या बढ़ते जा रही है। दर्शकों के बीच यह आकर्षण का केंद्र है। इस कारण जिराफ केज का विस्तार किया जा रहा है।

पीके गुप्त, मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक, बिहार

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