नक्सलियों के 'रेड कॉरिडोर' से बाहर निकला गयाजी, अब बिहार का सबसे बड़ा 'इंडस्ट्रियल हब' बनने को तैयार
गयाजी, जो कभी नक्सल प्रभावित था, अब बिहार का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र बनने की राह पर है। यहां औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, जिससे निवेशकों का ध्यान आकर्षित हो रहा है। यह क्षेत्र अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (AKIC) और मेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का भी हिस्सा है। सरकार भी इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा दे रही है, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बुनियादी ढांचे का विकास होगा।

गयाजी भारत के मेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, पटना। गयाजी अब 'लाल नक्शे' से बाहर आ रहा है। कभी देश के 'रेड कारिडोर' में शामिल यह इलाका, अब भारत के मेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का हिस्सा है। गया जिले के डोभी के पास 1670 एकड़ में आकार ले रहा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर (IMC) इसकी पहचान बदल रहा है। यह क्लस्टर अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (एकेआईसी) का हिस्सा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिनों पहले अपने भाषण में सरकार के 'विकास भी, विरासत भी' दृष्टिकोण पर बल दिया था। यह परियोजना उसी के अनुरूप आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ गया की सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा देगी, जो अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रा और विरासत पर्यटन के लिए प्रसिद्ध केंद्र है।
बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, सालभर पहले राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) और बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बीआईएडीए) ने गया में एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (आईएमसी) विकसित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
इस परियोजना के तहत विकसित हो रहे बिहार के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा, आटो पार्ट्स और इलेक्ट्रानिक जैसे उद्योग स्थापित होंगे।
निवेश और रोजगार: भविष्य में, इस क्षेत्र में 16524 करोड़ रुपये के निवेश और 1.09 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
सड़क कनेक्टिविटी: इस औद्योगिक क्षेत्र को एनएच-19 से जोड़ने के लिए एक विशेष सड़क परियोजना को मंजूरी दी गयी है और यह काम शुरू हो गया है। इसके अतिरिक्त, निलांजन नदी और धरधरी नदी पर पुल बनाने का भी प्रस्ताव है। यह भी योजना है कि कारिडोर के लगभग 30-40 प्रतिशत हिस्से पर पौधरोपण किया जाएगा। ताकि वायु प्रदूषण का प्रभाव कम हो सके।
एक लाख से अधिक नौकरी और रोजगार
गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से 39 किलोमीटर दक्षिण में स्थित आईएमसी गया, 1,670 एकड़ में फैला है, जिसमें 16,524 करोड़ रुपये की अनुमानित निवेश क्षमता और 1,339 करोड़ रुपये की परियोजना लागत होगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से लगभग 1,09,185 नौकरियों के सृजन की उम्मीद है, जिससे स्थानीय समुदाय को आर्थिकी को बढ़ावा मिलेगा।
IMC गया को निर्माण सामग्री, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण, चमड़े के सामान, रेडीमेड वस्त्र, फर्नीचर, हथकरघा और हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग और निर्माण और चिकित्सा उपकरण सहित कई क्षेत्रों में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए रणनीतिक रूप से विकसित किया जा रहा है।
नियोजित बुनियादी ढांचा और सुविधाएं
इस क्लस्टर में व्यापक बुनियादी ढांचे जैसे 29.89 किमी का आंतरिक सड़क नेटवर्क, 220/33 केवी और 33/11 केवी विद्युत सबस्टेशन, 162 एमवीए सुनिश्चित विद्युत आपूर्ति और 19 एमएलडी जलापूर्ति प्रणाली के साथ-साथ कौशल विकास केंद्र, फायर स्टेशन, प्रशासनिक कार्यालय, पार्किंग और औद्योगिक परिचालन और कार्यबल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक स्थान शामिल होंगे।
क्लस्टर में पर्यावरण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र, सीवेज उपचार संयंत्र, जल उपचार संयंत्र, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, वर्षा जल निकासी और हरित भूनिर्माण जैसी 'प्लग एंड प्ले' बुनियादी सुविधाएं भी होंगी।
कंपनियों ने दिखाई रुचि
लगभग एक सौ कंपनी के अधिकारी जमीन का निरीक्षण कर चुके हैं। वर्तमान समय में अधिग्रहीत जमीन के चारों तरफ पिलर गाड़ा जा रहा है। इस औद्योगिक गलियारे से रेलवे, हवाई और सड़क तीनों मार्गों से जोड़ने का कार्य होगा।
उम्मीद है कि गया आईएमसी आर्थिक विकास को गति देगा, रोजगार के व्यापक अवसर पैदा करेगा और बिहार को पूर्वी भारत में एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा, जिससे ''मेक इन इंडिया'' की दृष्टि को और मजबूती मिलेगी। -डॉ दिलीप जायसवाल, उद्योग मंत्री, बिहार।

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