जागरण संवाददाता, पटना : भवन निर्माण विभाग द्वारा माली पद पर नियुक्ति के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने के मामले में गिरफ्तार कौशलेंद्र कुमार को सचिवालय थाने की पुलिस ने गुरुवार को जेल भेज दिया। वह मूलरूप से जहानाबाद जिले का रहने वाला है। ठगे गए चार अभ्यर्थियों की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बड़ी बात है कि उद्योग विभाग के एक अधिकारी से कौशलेंद्र के साठगांठ के प्रमाण मिले हैं। इसी की बदौलत विकास भवन में उसका धड़ल्ले से आना-जाना था। यही कारण था कि वह उद्योग भवन के वेटिंग रूम में बैठकर अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लेता था। हालांकि, अभी पुलिस उस अधिकारी के बारे में बताने से कतरा रही है। सिटी एसपी अम्बरीश राहुल ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। गिरफ्तार कौशलेंद्र को जेल भेज दिया गया है। गिरोह के सरगना तक पहुंचने की कवायद की जा रही है। अनुसंधान अभी जारी है।

मोबाइल की जांच से खुल सकते राज

ठगी के शिकार हुए प्रेमराज, सुमन समेत अन्य अभ्यर्थियों ने बताया कि कौशलेंद्र का मोबाइल भी पुलिस को सौंपा गया है। जब युवकों ने उसे विकास भवन के पास पकड़ा था तो उसके मोबाइल का लाक खुला था। उस दौरान उसमें 150 से अधिक अभ्यर्थियों के दस्तावेज और कई अधिकारियों के नंबर सेव मिले थे। इस बात की जानकारी सचिवालय थाने की पुलिस को भी दी गई थी। पुलिस को उसका मोबाइल भी सौंपा गया है। अभ्यर्थियों की मानें तो विकास भवन के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के नंबर भी सुरक्षित हैं। कई बार वह खुद नीचे न आकर सुरक्षाकर्मियों को काल कर देता था, जिसके बाद उससे मिलने आए लोगों को विकास भवन में प्रवेश करा दिया जाता था। 

अमित की पहचान में जुटी पुलिस

गिरोह के दलाल अमित की पहचान करने में पुलिस जुट गई है। अब तक पुलिस को यह नहीं पता कि अमित उसका असली नाम है भी या नहीं? उसने सुमन समेत अन्य अभ्यर्थियों को अपने घर का पता केवल मुजफ्फरपुर बताया था। कौशलेंद्र की गिरफ्तारी के बाद से अमित का मोबाइल भी बंद आ रहा है। प्रारंभिक जांच में मालूम हुआ है कि अमित अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर विकास भवन तक बुलाता था। इसके बाद कौशलेंद्र उन्हें उद्योग भवन के वेटिंग रूम में ले जाकर साक्षात्कार लेता था। साक्षात्कार होने के बाद अमित अभ्यर्थियों से पांच-पांच लाख नकदी लेता, फिर उनके घर पर नियुक्तिपत्र भेजा जाता था। नियुक्ति पत्र लेकर जब अभ्यर्थी विश्वेश्वरैया भवन स्थित भवन निर्माण विभाग के कार्यालय पहुंचते तो वहां तीसरा आदमी मिलता, जो विभिन्न सरकारी आवासों और बंगलों में उन्हें माली का काम करने के लिए भेजता था। 

Edited By: Akshay Pandey