सावधान! आपके बच्चों तक पहुंच रहा जहरीला दूध, खतरनाक केमिकल मिला रहे दूधवाले; दानापुर डेयरी की जांच में पुष्टि
खाद्य संरक्षा विभाग ने दानापुर की एक डेयरी पर छापा मारा, जहाँ दूध में जहरीले फार्मेलिन की मिलावट पाई गई ...और पढ़ें

फार्मेलिन की पुष्टि के बाद दूध को नष्ट कराते खाद्य संरक्षा पदाधिकारी। l जागरण
HighLights
दानापुर डेयरी में दूध में जहरीले फार्मेलिन की मिलावट मिली।
मिलावट के बाद 180 लीटर दूध मौके पर बहाया गया।
फार्मेलिन युक्त दूध बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक।
जागरण संवाददाता, पटना। दूध जल्दी नहीं फटे, खराब नहीं हो और अधिक से अधिक मात्रा में बिक सके, इस लालच में लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। खाद्य संरक्षा विभाग ने मंगलवार को दानापुर के भट्टीपर पीपापुल के पास दूध-पनीर विक्रेताओं के यहां छापेमारी की।
सात नमूनों की मौके पर जांच में एक दूध में शव को सड़ने से बचाने के काम आने वाला जहरीले फार्मेलिन की मिलावट की पुष्टि हुई। इसके बाद डेयरी में रखा 180 लीटर दूध मैदान में बहा दिया गया।
खाद्य संरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि के निर्देश पर अभिहित पदाधिकारी सह खाद्य संरक्षा अधिकारी सुदामा चौधरी के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई।
मौके पर जांच के लिए वरीय विश्लेषक मुकेश चंद्र प्रसाद साथ थे। अधिकारियों के अनुसार शिकायतों के आधार पर खाद्य संरक्षा आयुक्त ने पटना जंक्शन, दानापुर समेत तमाम दूध मंडियों की औचक जांच करने का आदेश दिया है।
इसके लिए मौके पर जांच के लिए फेरिक क्लोराइड, एच2एचओ4, डिस्टिल वाटर व टेस्ट ट्यूब उपलब्ध कराई गई है। दूध में फार्मेलिन के साथ स्टार्च मिलावट की जांच पर जोर हैं। यह जांच अभियान जारी रहेगा।
डेयरी संचालक ने कहा-पशुपालक कर रहे मिलावट
जिस डेयरी के दूध में फार्मेलिन की मिलावट मिली, वहां मौके से फार्मेलिन, हाइड्रोजन परक्साइड या अन्य कोई संदिग्ध रसायन नहीं मिला। डेयरी संचालक श्याम राय ने बताया कि उसकी ओर से दूध में कोई रसायन नहीं मिलाया गया।
उसके अनुसार कुछ पशुपालक दूध को फटने से बचाने और उसकी अवधि बढ़ाने के लिए दूध में फार्मेलिन या अन्य पदार्थ मिलाकर लाते हैं। उसके इस दावे ने अधिकारियों को बेचैन कर दिया क्योंकि सभी पशुपालकों पर कार्रवाई या उन्हें जागरूक करना बड़ी चुनौती है।
खाद्य संरक्षा पदाधिकारी सुदामा चौधरी ने डेयरी संचालक को फार्मेलिन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए दोबारा मिलावट मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
इसके पूर्व पटना जंक्शन स्थित दूध मंडी में जांच की गई लेकिन वहां फार्मेलिन की मिलावट नहीं मिली। हालांकि, एक दूध में स्टार्च की मिलावट की पुष्टि हुई है।
फार्मेलिन से आंख-त्वचा पर दुष्प्रभाव
न्यू गार्डिनर अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिन्हा ने बताया कि फार्मेलिन के संपर्क या सेवन से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से आंख व त्वचा पर पड़ता है।
इससे आंखों में जलन, पानी आना व लाल होने की शिकायत हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क में आने या पीने से कैंसर जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं।
70 प्रतिशत बच्चों पर कुपोषण समेत गंभीर रोगों का संकट
आइजीआइसी के शिशु रोग विशेषज्ञ डा. बीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 70 प्रतिशत बच्चे छोटी उम्र से बाहर के दूध पर निर्भर होते हैं। फार्मेलिन तो खैर बहुत विषाक्त पदार्थ है, यदि यूरिया, स्टार्च, डिटरजेंट या गंदे पानी की भी मिलावट हो तो बच्चों में घातक दुष्प्रभाव सामने आ सकते हैं।
ऐसा दूध पीने से गैस्ट्रोएंट्राइटिस, भूख नहीं लगना शुरुआती लक्षण हैं। इसके अलावा उनका विकास बाधित होता है, कुपोषण के शिकार हो जाते हैं, उनका आइक्यू सामान्य बच्चों से कम होता है और वे सामान्य संक्रमण की चपेट में आसानी से आ जाते हैं।
लंबे समय तक इसका प्रयोग करने से किडनी व लिवर तक प्रभावित हो सकता है। वहीं फार्मेलिन व अन्य भारी तत्वों के कारण विभिन्न अंगों के कैंसर तक की आशंका बढ़ जाती हैं।
मिलावट का शक हो तो यहां करें शिकायत
- एफएसएसएआइ के टोल-फ्री नंबर 1800-11-2100
- बिहार खाद्य सुरक्षा विभाग : fsohqfsdbihar@gmail.com
- गर्दनीबाग स्थित सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में खाद्य संरक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में।
- स्वास्थ्य विभाग के मेल health-bih@nic.in पर ।
- कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए दुकान-डेयरी का नाम-पता, खाद्य पदार्थ, खरीद की तारीख, बिल-पैकेट, बैच नंबर व फोटो जरूर रखें।
घर में ऐसे पहचानें दूध में मिलावट
-पानी की मिलावट: साफ कांच की प्लेट या स्टील की सतह पर दूध की एक बूंद डालें। बूंद तेजी से बह जाए और पीछे सफेद निशान बहुत कम रहे तो पानी की मिलावट हो सकती है।
-स्टार्च की मिलावट: दूध को ठंडा कर उसमें आयोडीन की कुछ बूंदें डालने पर नीला या नीला-बैंगनी रंग दिखे तो स्टार्च की मौजूदगी का संकेत मिलता है।
-डिटर्जेंट: दूध को थोड़े पानी के साथ जोर से हिलाने पर यदि बहुत अधिक और लंबे समय तक झाग बना रहे तो डिटर्जेंट की आशंका हो सकती है।
-फार्मेलिन: एक टेस्ट ट्यूब में 10 मिलीलीटर दूध लें, ट्यूब झुकाएं व किनारे से सावधानीपूर्वक 5 मिलीलीटर सांद्र सल्फ्यूरिक एसिड डालें, यदि फार्मेलिन होगा तो सतह पर बैंगनी रंग का घेरा दिखेगा।
एच2एसओ4 खतरनाक तेजाब है इसलिए बेहतर होगा यह जांच खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला में कराएं। शिकायत देने के बाद यह जांच निशुल्क की जाती है।
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