सिर्फ पैकेट देखकर न खाएं धोखा, जानिए मिलावटी खाने की शिकायत और जांच के नियम
खाद्य सामग्री की शुद्धता केवल पैकेज देखकर तय नहीं होती, बल्कि उसपर दी गई जानकारी और प्रयोगशाला जांच से होती है।

सिर्फ पैकेट देखकर न खाएं धोखा (AI Generated Image)
HighLights
खाद्य सामग्री की शुद्धता पैकेज जानकारी से जांचें।
आम नागरिक भी खाद्य नमूने की जांच करा सकते हैं।
मिठाइयों में सामग्री और रंग नियमों का पालन करें।
जागरण संवाददाता, पटना। बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की शुद्धता केवल पैकेट देखकर तय नहीं की जा सकती।
पैकेट पर ब्रांड, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख, सामग्री, निर्माता का पूरा पता, बैच नंबर, वजन, एमआरपी और पोषण संबंधी जानकारी सहित जरूरी विवरणों की जांच कर उपभोक्ता खाद्य पदार्थ के बारे में शुरुआती जानकारी हासिल कर सकते हैं।
हालांकि, सामग्री में मिलावट है या नहीं की पुष्टि प्रयोगशाला में जांच के बाद ही हो सकती है। खास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आम नागरिक भी निर्धारित प्रक्रिया अपनाकर खाद्य पदार्थों का नमूना जांच के लिए दे सकते हैं।
ये बातें सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित जागरण विमर्श में खाद्य संरक्षा विभाग के सेवानिवृत्त सहायक अभिहित पदाधिकारी तपेश्वरी सिंह ने कहीं।
विषय था खाद्य सामग्रियों की शुद्धता:
सतर्कता, जागरूकता और चुनौतियां। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा के लिए उपभोक्ताओं की सतर्कता के साथ विभागीय निगरानी और प्रयोगशाला जांच भी जरूरी है।
वर्तमान में बिहार सरकार की मुख्य प्रयोगशाला संयुक्त औषधि एवं खाद्य नियंत्रण प्रयोगशाला अगमकुआं में स्थित है।
खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के नेतृत्व में सरकार जल्द ही मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी नई खाद्य जांच प्रयोगशालाएं खोलने की तैयारी कर रही है।
दो तरह से लिए जाते हैं खाद्य पदार्थों के नमूने
खाद्य सुरक्षा अधिकारी बाजार से मुख्य रूप से दो तरह के नमूने लेते हैं। पहला निगरानी यानी सर्विलांस सैंपल और दूसरा कानूनी सैंपल। सर्विलांस सैंपल का उद्देश्य किसी बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की स्थिति का पता लगाना है।
इसके आधार पर संबंधित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने में मदद मिलती है। वहीं, कानूनी सैंपल निर्धारित प्रक्रिया के तहत चार हिस्सों में लिया जाता है।
एक हिस्सा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है, जबकि अन्य हिस्से डीओ के कार्यालय में सुरक्षित रखे जाते हैं।
खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट 14 दिनों के भीतर अभिहित पदाधिकारी को भेजी जाती है, और नमूना मानक अनुकूल न होने पर कारोबारी को नोटिस जारी कर केंद्रीय प्रयोगशाला में पुनर्जांच का विकल्प दिया जाता है। मानकों पर खरा न उतरने वाले खाद्य पदार्थों के मामलों में न्यायालय द्वारा दंड का प्रावधान किया जाता है।
आम नागरिक भी करा सकते हैं जांच
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आम नागरिक भी निर्धारित प्रक्रिया से खाद्य पदार्थों की जांच करा सकते हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी फॉर्म-5 ए का उपयोग करते हैं, जबकि आम नागरिक फॉर्म-5 बी के माध्यम से नमूने की जांच के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके लिए संबंधित दुकानदार को निर्धारित तरीके से सूचना देने, फॉर्म भरने और जांच शुल्क जमा करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो जांच शुल्क वापस किया जा सकता है।
वहीं, शिकायत सही नहीं मिलने पर शुल्क वापस नहीं मिलता। किसी दुकान पर मिलावटी या अस्वच्छ तरीके से खाद्य सामग्री बिकने की जानकारी संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी या विभागीय कार्यालय को भी दी जा सकती है।
मिठाई की दुकानों पर सामग्री और रंग का रखें ध्यान
दुकानों पर मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की जानकारी प्रदर्शित होनी चाहिए। केवल अनुमत खाद्य रंगों का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। औद्योगिक रंगों का उपयोग प्रतिबंधित है।
मिठाइयों पर लगाई जाने वाली चांदी की वर्क या उसके विकल्प भी खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने चाहिए। उपभोक्ताओं को जागरूक रहना चाहिए।
मिठाई विक्रेताओं और खाद्य पदार्थों के लिए महत्वपूर्ण नियम
- मिठाई विक्रेताओं को अपनी दुकान में एक बोर्ड लगाना अनिवार्य है, जिस पर हर मिठाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री (जैसे- खोया, छेना, या मैदा की तय मात्रा) की पूरी जानकारी लिखी हो।
- सामग्री की गलत जानकारी देने या उसे छिपाने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सुधार नोटिस जारी किया जा सकता है या भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
- दाल या अन्य खाद्य पदार्थों में औद्योगिक रंगों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल स्वीकृत प्राकृतिक रंगों (जैसे हल्दी) का ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
- लेड क्रोमेट जैसे खतरनाक और जहरीले रसायनों का उपयोग भोजन में पूरी तरह प्रतिबंधित और कानूनन अपराध है।
