कटिहार [नीरज कुमार]। इस वर्ष 13 अगस्त को अचानक महानंदा के रौद्र रूप में आने से कटिहार को बाढ़ की भीषण त्रासदी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को सात घंटे के अंदर छह स्थानों पर महानंदा तटबंध टूटने से देखते ही देखते कदवा, आजमनगर सहित पांच प्रखंडों में जलप्रलय की स्थिति बन गई।

पानी के तेज बहाव में कच्चे मकान देखते ही देखते धराशयी हो गए। तेज बहाव में डंडखोरा के भमरैली में अर्धनिर्मित भवन ध्वस्त हो गया। आजमनगर में दोमंजिला इमारत भी पानी के बहाव को झेल नहीं पाई। हालत यहां तक पहुंच गई कि पानी के करंट (तेज बहाव) को देख एनडीआरएफ की टीम ने भी 14 अगस्त को तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में असमर्थता जताते हुए दूसरे दिन से राहत कार्य चलाने की बात कही थी।

तीन दशक पूर्व 1987 में महानंदा तटबंध टूटने से कटिहार को बाढ़ की भीषण तबाही झेलनी पड़ी थी। बाढ़ का पानी शहरी क्षेत्र में भी प्रवेश कर गया था। जानमाल की व्यापक क्षति हुई थी। इसके बाद भी हर वर्ष बाढ़ का संकट झेलने को कटिहार अभिशप्त रहा। बाढ़ निरोधात्मक कार्य समय पर पूरा नहीं किए जाने के कारण कई स्थानों पर जर्जर हो चुका तटबंध पानी के दबाव को झेल नहीं पाया।

आजमनगर एवं अमदाबाद में चार स्थानों पर अब भी महानंदा तटबंध को कटाव से बचाने की कोशिश की जा रही  है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र का पूर्वोत्तर भारत एवं पश्चिम बंगाल से रेल संपर्क पूरी तरह भंग हो चुका है। तीन दिनों के भीतर ही मानव क्षति का आंकड़ा डेढ़ दर्जन तक पहुंच गया है।

बाढ़ पूर्व पुख्ता तैयारी नहीं होने के कारण सड़क, पुल जैसी आधारभूत संरचना को भी व्यापक क्षति पहुंची है। पिछले वर्ष 50 करोड़ की क्षति सड़क एवं पुलियों के ध्वस्त होने से हुई थी। इस वर्ष पिछले तीन दिनों में ही अब तक 60 करोड़ की आधारभूत संरचना की क्षति होने का अनुमान है। लगातार हो रही तेज बारिश ने पीडि़तों पर कहर ढाने का काम किया है।

तटबंध भी सुरक्षित नहीं होने से वहां शरण लिए लोगों में भी भय व्याप्त है। बाढ़ से अब तक सात प्रखंडों की 10 लाख की आबादी प्रभावित है। प्रशासनिक स्तर से कुछ स्थानों पर राहत शिविर शुरू किए गए हैं, लेकिन लोगों को सुरक्षित निकालना अभी प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पानी से घिरे लोगों की जान हर पल सांसत में पड़ी हुई है। प्रशासन द्वारा अधिकांश लोगों को सुरक्षित निकाल लिए जाने की बात कही जा रही है। प्रभावित इलाकों में संचार व्यवस्था ठप होने से वास्तविक स्थिति का आकलन प्रशासनिक स्तर से भी नहीं हो पा रहा है।

Posted By: Ravi Ranjan

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