पटना [जेएनएन]। बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट मामले में चार साल 10 महीने और 12 दिन के बाद शुक्रवार को एनआइए कोर्ट ने सभी पांच आरोपितों को दोषी ठहराया। अब उनकी सजा का फैसला 31 मई को होगा। ये आरोपी हैं- इंडियन मुजाहिदीन के अजहर कुरैशी, इम्तियाज अंसारी, मोजिबुल्लाह अंसारी, हैदर अली और उमर सिद्दीकी। इस मामले में 90 लोगों ने गवाही दी।
सुबह-सुबह धमाकों से दहल गया था बिहार
वो 7 जुलाई, 2013 की सुबह थी, जब छह बजे बोधगया में महाबोधि मंदिर और उसके आसपास  एक के बाद एक नौ विस्फोट हुए थे। आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे। एक सिलेंडर बम रखा गया था, जिसमें टाइमर लगा हुआ था। इन सबकी साजिश बड़ी घटना को अंजाम देने की थी।

विस्फोट के बाद सुरक्षा बलों ने तीन बिना फटे और निष्क्रिय किए हुए बम भी बरामद किए थ। इन धमाकों का एक ही मकसद था कि सुबह-सुबह जब बौद्ध अनुयायी प्रार्थना के लिए आएं तो खून-खराबा हो। तेरगर मठ में फटे तीन बम खेल के मैदान में लगाए गए थे, जहां नए भिक्षु फुटबॉल खेलते थे।
रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला था विस्फोट
एनआईए ने जांच में यह भी माना है कि इन आरोपितों ने रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए बोधगया में सीरियल ब्लास्ट किया था। ब्लास्ट के समय विदेशी तीर्थयात्री प्रार्थना के लिए जमा थे। पांच धमाके महाबोधि मंदिर परिसर के भीतर हुए थे, तीन तेरगर मठ में हुए थे जहां करीब 200 प्रशिक्षु भिक्षु रहते थे और एक-एक धमाका 80 फुट की बुद्ध प्रतिमा के पास और बाइपास के करीब बस स्टैंड पर हुए थे।

 हैदर अली ने बनाई थी बम-विस्फोट की योजना
ब्लास्ट के लिए हैदर ने रायपुर में रहने वाले सिमी के सदस्य उमर सिद्दीकी से संपर्क किया था। हैदर रायपुर गया था और वहां राजा तालाब स्थित एक मकान में जिहाद के नाम पर उसे दीनी बातें बताकर भड़काया गया था। हैदर को बम विस्फोट का सामान भी वहीं दिया गया था।

हैदर ने ब्लास्ट के पहले बोधगया का चार-पांच बार दौरा कर वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। हैदर और उसके साथी आतंकी संगठन सिमी के सदस्य थे। हैदर अली ने बौद्ध भिक्षु बनकर मंदिर में प्रवेश किया और विस्फोट किया था।
कपड़े से मिले एक बाल ने हैदर तक पहुंचाया
एनआईए की टीम को बौद्ध भिक्षु के कपड़े पर एक बाल मिला था। बाल के डीएनए टेस्ट से एनआईए को हैदर के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले। 
गृह मंत्रालय ने बताया था -ये आतंकी हमला है
गृह मंत्रालय ने बिहार में महाबोधि मंदिर के भीतर और बाहर हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों को आतंकी हमला बताया था और जांच के लिए एनआईए तथा एनएसजी की टीमें घटनास्थल पर भेजी गई थीं।

तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने कहा था कि यह एक आतंकी हमला है। गृह सचिव ने कहा था कि साक्ष्य जुटाने और जांच में पुलिस की मदद करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की टीमें तथा विस्फोट विशेषज्ञ बिहार भेजे गए हैं। 
 जानिए दोषी आतंकियों के बारे में...
हैदर अली : रांची के डोरंडा थाना के हाथीखाना का रहने वाला है। 2014 से बेऊर जेल में बंद है। यह ब्लास्ट का मास्टर माइंड था। उसने बौद्ध भिक्षु बनकर ब्लास्ट किया था। इससे पहले उसने बोधगया पहुंच मंदिर की पांच बार रेकी की थी।
इम्तियाज अंसारी : 
रांची के धुर्वा थाने के सीटियों का रहने वाला है। 2013 से जेल में बंद है। ब्लास्ट करने में इसने हैदर का साथ दिया था। वह भी उस दिन गया आया था।
मुजीबुल्लाह अंसारी : रांची के ओरमांझी थाने के चकला गांव का निवासी है। वो भी 2014 से बेऊर जेल में बंद है।
उमर सिद्दीकी : छत्तीसगढ़ के रायपुर के राजा तालाब के नूरानी चौक का रहने वाला है। 2013 से जेल में बंद है। इसी के घर पर ब्लास्ट की योजना बनी थी।
अजहर कुरैशी : छत्तीसगढ़ के रायपुर के राजातालाब के नया बस्ती का रहने वाला है। 2013 से जेल में बंद है। बोधगया में ब्लास्ट करने की योजना बनाने में रायपुर में शामिल था।

 

Posted By: Kajal Kumari

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