पटना, दीनानाथ साहनी । Bihar Cabinet Expansion सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल (cabinet) में कई पुराने चेहरे को भाव नहीं दिया गया है। इसके चलते कई पुराने दिग्गजों को निराशा हाथ लगी है। मंत्री बनने की उम्मीदें टूट गईं। भाजपा (BJP) ने बड़ा फैसला लेते हुए सबसे पहले अपने बड़े नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) को प्रदेश की सियासत से हटाया। बदलाव का क्रम आगे भी जारी रखा और पिछली सरकार में मंत्री रहे पांच पुराने नेताओं को भाव नहीं दिया। नए सियासी समीकरण (New political equations) में जदयू (JDU) के पूर्व तीन मंत्री भी खाली हाथ रह गए।

भाजपा ने जिन्हें नहीं बनाया मंत्री

गया नगर सीट से लगातार सातवीं बार जीते डॉ. प्रेम कुमार (MLA from Gaya Town Dr. Prem Kumar) 2005 से ही नीतीश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। इस बार उन्हें कोई भाव नहीं दिया गया है। पिछली बार वे कृषि मंत्री थे। इसी तरह पटना साहिब से छठी बार जीते विधायक नंदकिशोर यादव (Nand Kishore Yadav) को भी मंत्री नहीं बनाया गया है। ये नीतीश सरकार में पथ निर्माण व स्वास्थ्य महकमे संभाल चुके हैं। बेनीपट्टी के विधायक विनोद नारायण झा (Vinod Narayan Jha) पिछली सरकार में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री थे, लेकिन इस बार भाजपा ने उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी है। पिछली सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रहे बांका के विधायक राम नारायण मंडल (Ram Narayan Mandal) को भी मंत्री पद गंवाना पड़ा है। मधुबन से विधायक राणा रणधीर (Rana Randhir) भी मंत्री नहीं बनाए गए हैं। पिछली बार ये सहकारिता मंत्री थे।

जदयू के ये नेता नहीं बन पाए मंत्री

1995 से आलमनगर सीट से लगातार जीत दर्ज कराने वाले नरेंद्र नारायण यादव (Narendra Narayan Yadav) भी इस बार मंत्री बनने से चूक गए। जदयू के ये पुराने और समर्पित नेता माने जाते हैं। ये पूर्व में योजना एवं विकास विभाग के अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री रह चुके हैं। जदयू ने कल्याणपुर के विधायक महेश्वर हजारी (Maheshwar Hazari)  को मंत्रिमंडल में भाव नहीं दिया है। पिछली सरकार में ये भवन निर्माण मंत्री थे। रुपौली सीट से कई बार विधायक रह चुकी बीमा भारती (Bima Bharti) पिछली सरकार में गन्ना उद्योग मंत्री थीं। इस बार इन्हें भी मंत्रिमंडल में तवज्जो नहीं दी गई है।

नीतीश मिश्रा के भी हाथ लगी निराशा

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.जगन्नाथ मिश्र के पुत्र नीतीश मिश्र (Nitish Mishr) को भी उम्मीद थी कि मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह मिलेगी। लेकिन, उन्हें भी निराशा हाथ लगी है। पहली बार जदयू के टिकट पर झंझारपुर से जीते नीतीश मिश्रा ग्रामीण विकास मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद वे जदयू को छोड़ कर भाजपा में चले गए थे जहां से इस बार वे झंझारपुर से जीते हैं।

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