जितेंद्र कुमार, पटना
गेट खोलिए सर। मरीज मर जाएगा। देखिए अस्पताल का पुर्जा है। अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गया। दो लोग कंधे पर सिलेंडर लेकर आए हैं। सिलेंडर भर दीजिए नहीं तो मरीज मर जाएगा। आपके अस्पताल को दूसरी एजेंसी से टैग कर दिया गया है। अभी तो ऑक्सीजन सप्लाई देखकर डीडीसी साहब पटना सिटी की तरफ गए हैं।
पटना के सिपारा स्थित उषा एयर प्लांट में 70 किलो वजन का सिलेंडर कंधे पर लेकर दौड़कर आए मरीज के स्वजन कुछ इसी अंदाज में गिड़गिड़ा रहे हैं।
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समय - दोपहर 2.00 बजे
उषा एयर प्लांट का मुख्य गेट बंद है। बाहर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर खड़ा युवक चिल्ला रहा है- गेट खोलिए ..। मेरा मरीज मर जाएगा। मुख्य गेट से सटे एक छोटा गेट खुला तो पुलिस के जवान के साथ दंडाधिकारी सुरेश कुमार मेहता रजिस्टर लेकर बैठे दिखे। युवक से पूछा कौन अस्पताल से आए हैं? आपका अस्पताल गौरव एजेंसी के साथ टैग कर दिया गया। अभी तो डीडीसी साहब देखकर पटना सिटी के तरफ गए हैं।
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समय - 2.15 बजे
दानापुर मिलिट्री अस्पताल की गाड़ी ऑक्सीजन सिलेंडर के इंतजार में खड़ी है। सेना सेवा कोर का जवान संजय बता रहे हैं महीने में 15 से 20 ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ती थी। अब हर दिन 25 से 30 सिलेंडर खपत हो रही है। कोरोना के करीब 100 मरीज भर्ती हैं। छुट्टी पर घर आए जवान और सैनिक के स्वजन इलाज के लिए लगातार आ रहे हैं। बिहटा वायु सेना केंद्र से भी इलाज के लिए आ रहे हैं।
समय - 2.30 बजे
मेरा नाम विनोद कुमार है। प्लांट का मैनेजर हूं। कोरोना के पहले औसत 1000 सिलेंडर तैयार किए जाते थे। जिला प्रशासन तीनों शिफ्ट में प्लांट संचालित करा रहा है। अभी तो प्रति घंटे करीब 90 सिलेंडर भरे जाते हैं। मानकर चलिए कि औसतन 24 घंटे में 2100 सिलेंडर की आपूर्ति हो रही है फिर भी बैकलॉग रह जाता है। मजिस्ट्रेट साहब एक-एक सिलेंडर का हिसाब रख रहे हैं। समय - 2.45 बजे
नोजल मैन सिलेंडर के मीटर पर नजर गड़ाए हैं। जैसे ही फिलिंग मीटर का कांटा 150 पहुंचता है नोजल बंद कर सिलेंडर निकालने लगते हैं। जंबो सिलेंडर का वजन करीब 60 से 65 किलो होता है। करीब 15 पाउंड आक्सीजन भरने के बाद करीब 70 किलो वजन हो जाता है। मजदूर नोजल प्वाइंट से सिलेंडर को अस्पताल की गाड़ियों में लोड करने में लगे हैं।
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-- कोट --
सुबह 7.00 से शाम 7.00 बजे तक करीब 1100 सिलेंडर की आपूर्ति हुई है। रात की पाली में थोड़ा कम हो जाता है, फिर भी 2000 से अधिक सिलेंडर फिलिंग हो रही है। यहां से सरकारी अस्पतालों को आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। कुछ निजी अस्पताल भी टैग थे जिसे दूसरे एजेंसी से आपूर्ति कराया जा रहा है।
सुरेश कुमार मेहता,
दंडाधिकारी, जिला प्रशासन, पटना
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