नलिनी रंजन, पटना। कभी अपनी खस्ताहाल कार्य-संस्कृति के लिए बदनाम रही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति आज दूसरों के लिए उदाहरण बनी हुई है। परीक्षा समिति ने हाल के वर्षों में कई उपलब्धियां अपने नाम की हैं। वर्ष 2019 भी इनके लिए जाना जाएगा। इनके कारण बोर्ड का नाम देश ही नहीं विदेशों में गर्व के साथ ऊंचा हुआ है। चाहे 20 दिनों के भीतर परिणाम जारी करने की उपलब्धि हो या त्रुटिहीन परीक्षाफल का प्रकाशन, कई रिकॉर्ड बिहार बोर्ड ने अपने नाम किए हैं। नए साल में बिहार बोर्ड में फाइल जहां माउस पर घूमेगी तो छात्रों के लिए विकल्प ही विकल्प होंगे।

इन उपलब्धियों को हासिल करने में समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर की पहल एवं मार्गदर्शन की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसकी तारीफ देश के कई अन्य राज्यों के परीक्षा बोर्ड ने भी की है। इन बोर्ड के अधिकारी यहां की परीक्षा शाखा के कामकाज को देखने पटना भी आए। अब वे अपने राज्यों में इसे लागू करने जा रहे हैं। केवल राज्य बोर्ड ही नहीं दूसरे देश में भी बोर्ड की उपलब्धियों की गूंज पहुंची है। हाल ही में नेपाल के परीक्षा बोर्ड की टीम बिहार बोर्ड की परीक्षा प्रणाली समझने के लिए पटना पहुंची थी। संतुष्ट होकर अपने देश रवाना हुई।

कम समय में कॉपियों का मूल्यांकन

बिहार बोर्ड में हर वर्ष मैट्रिक की परीक्षा के लिए लगभग 16-18 लाख एवं इंटर के लिए 14-16 लाख विद्यार्थी परीक्षा फॉर्म भरते हैं। इतनी बड़ी संख्या में कॉपियों के मूल्यांकन के बाद परिणाम काफी कम दिनों में जारी हो रहे हैं।

नई तकनीक व सॉफ्टवेयर साबित हुए वरदान

बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर स्वयं आइआइटी कानपुर के छात्र रहे हैं। तकनीक से परिचित होने के कारण बोर्ड की कई प्रणालियों को स्वयं अपने निर्देशन में तैयार कराया है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से कार्यप्रणाली में सुधार के कारण यह अब देश के बेहतर बोर्ड में शुमार होने लगा है। पैटर्न में बदलाव से वर्ष 2019 में बोर्ड का परिणाम भी सुधरा है। 80 फीसद से अधिक परीक्षा परिणाम रहा है। छात्रों ने 94 फीसद तक अंक प्राप्त किए हैं।

कॉपियों एवं ओएमआर शीट पर पहले से अंकित रहता है नाम

समिति ने वर्ष 2019 में पहली बार विद्यार्थियों के नाम, रौल नंबर, रौल कोड, विषय आदि को उत्तरपुस्तिकाओं एवं ओएमआर पर अंकित कर सभी परीक्षार्थियों की अलग-अलग कॉपियां छपवाईं। बारकोडेड कॉपियों के अंक सीधे मूल्यांकन केंद्रों से ही कंप्यूटर में दर्ज हो जाते हैं। बोर्ड ने सभी विषयों के प्रश्नपत्र 10 सेट में तैयार कराए थे। जबकि सभी विषयों में 50 फीसद वस्तुनिष्ठ प्रश्न रखे थे।

माउस से घूमेगी बिहार बोर्ड में फाइल

उपलब्धियों का क्रम जारी रखते हुए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से वर्ष 2020 को भी यादगार बनाने की कोशिश जारी रहेगी। समिति द्वारा वर्ष 2020 में होने वाली मैट्रिक एवं इंटर परीक्षा में विद्यार्थियों को खूब विकल्प मिलेंगे। इसके लिए बिहार बोर्ड ने खास तैयारियां की है। परीक्षा समिति अपने सभी शाखाओं को पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड करने के लिए आइपीआर सिस्टम लागू कर रही है। इससे बिहार बोर्ड के कार्य पूरी तरह कंप्यूटर बेस्ड हो जाएंगे। इससे बोर्ड पेपरलेस हो जाएगा। यहां फाइल भी माउस के सहारे घूमेगी (ट्रांसफर होगी)।

2020 की परीक्षा में छात्रों को मिलेंगे खूब ऑप्शन

बिहार बोर्ड की 2020 की मैट्रिक एवं इंटर परीक्षा में भी 50 फीसद वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। हालांकि उनके पास विकल्प रहेगा। प्रश्नों की संख्या 20 फीसद अधिक रहेगी। इसके तहत 100 अंको वाली परीक्षा में 50 अंक वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के लिए निर्धारित होंगे। पेपर में 60 वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। इनमें 50 के ही जवाब देने होंगे। 70 अंकों वाली परीक्षा में छात्रों से 35 अंक के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। छात्रों को 42 ऑब्जेक्टिव प्रश्नों में से 35 का जवाब देना होगा।

Posted By: Akshay Pandey

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