पटना। शहर के थानों ने पुलिस उपमहानिरीक्षक के अतिक्रमण मुक्त अभियान की हवा निकाल दी। आदेश की चिट्ठी मिलने के बाद कई थानों की पुलिस ने जोर-शोर से फुटपाथी दुकानदारों और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी, लेकिन वह दिन बीतने के साथ विफल साबित हुई। विभिन्न थानों ने जिन चिन्हित स्थलों से अतिक्रमण हटाया था, वहां खोमचा और ठेला चालकों ने दोबारा कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि अतिक्रमण हटाने के दौरान थाना पुलिस ने 'पिक एंड चूज' की नीति अपनाई। पुलिस जिनकी दुकान हटाने चाहती थी, वहां कार्रवाई कर डीआइजी को फोटो भेज दी गई और कई पसंदीदा दुकानों को छोड़ दिया गया। यही हाल छज्जुबाग में एटीएस कार्यालय के आसपास हुआ। पुलिस ने कुछ लोगों का कब्जा और कुछ की झोपड़ियां रहने दीं। लिहाजा, एटीएस कार्यालय अब भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

बताते चलें कि अतिक्रमण नहीं हटने के कारण सड़कों की चौड़ाई कम हो गई थी। रोजाना जाम की स्थिति बन गई थी। इसके मद्देनजर डीआइजी राजेश कुमार ने अनुमंडलवार चिन्हित स्थलों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। मीठापुर बस स्टैंड से जक्कनपुर थाना तक की अवैध झोपड़ियां हटा दी गई, लेकिन वहां निजी बसों ने पड़ाव के लिए कब्जा जमा लिया। शाम होते ही एलिफिस्टन, मोना और रीजेंट सिनेमा घरों के बाहर ठेला-खोमाचा वालों की भीड़ लग जाती है। जाम की स्थिति जस की तस बनी है। आयकर कार्यालय के गेट पर भी ठेला दुकानदारों का कब्जा कायम है। बो¨रग रोड चौराहे पर जाम से निजात नहीं मिली। दोपहर से शाम तक चारों तरफ अतिक्रमणकारियों का कब्जा जमा रहता है। डीआइजी ने बताया कि आदेश की मियाद पूरी होने पर अनुमंडलवार समीक्षा की जाएगी। इसके बाद जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

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