पटना [राज्य ब्यूरो]। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा कि कृषि सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देकर अगले चार वर्षो में खेती की तकदीर बदलने की कोशिश जारी है। 2022 तक किसानों की माली हालत मजबूत हो जाएगी। आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

राधामोहन गाधी मैदान में कृषि विभाग द्वारा पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से आयोजित अंतरराष्ट्रीय एग्रो टेक मेला में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार में खेती एवं कृषि आधारित उद्योगों के लिए जापान, नीदरलैंड एवं इजरायल की मदद ली जा रही है। बिहार का 94 हजार वर्ग किमी एरिया गंगा नदी से सिंचित है। अगर यहां नई तकनीक से खेती को प्रोत्साहित किया गया तो लागत कम करके किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। हम पहले से ही यूरिया की खपत कम करके खेतों की सेहत सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। 10 करोड़ किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड दिया गया है। राधामोहन ने कहा कि किसानों के लिए जो कार्य आजादी से अबतक नहीं हुआ वह पिछले तीन सालों में किया गया। केंद्र की सत्ता में 70 वर्षो तक रहने वाली सरकारों की लापरवाही के कारण किसानों की माली स्थिति खराब होती चली गई। देश की 99 सिंचाई परियोजनाएं तीन दशकों से ठप पड़ी थी, जिनमें 40 पूरा होने को है। 2020 तक शेष भी पूरी हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने किसान एवं कृषि के हित में कई फैसले लिए हैं। कृषि लैब, सूक्ष्म सिंचाई इत्यादि को प्रमुखता दी गई है। 4500 किसान उत्पादक समूह (एफपीओ) गठित किए जा चुके हैं। खाद्य प्रसंस्करण एवं कोल्ड चेन बनाने को लेकर राशि का प्रबंध किया गया है। खुशी है कि बिहार सरकार ने जैविक कोरिडोर बनाने का निर्णय लिया है। कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार पंचायतों तक कृषि योजनाओं को लेकर जा रही है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स, बिहार इकाई के अध्यक्ष सत्यजीत सिंह ने कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता के आधार पर विकसित करने की जरूरत बताई। समारोह में पीएचडी सीसीआई के महासचिव सौरव सान्याल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

By Jagran