पटना [जेएनएन]। पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ यूनियन (पुसु) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिव्‍यांशु भारद्वाज और उपाध्यक्ष योशिता पटवर्धन का निर्वाचान मंगलवार को रद कर दिया गया। वहीं, संयुक्त सचिव मो. असजद उर्फ आजाद चांद का निर्वाचन बहाल रखा गया है।
निर्वाचन रद होने की खबर मिलते ही समर्थकों का हंगामा शुरू हो गया। प्रशासनिक भवन के सभी गेट बंद कर परिसर को पुलिस छाबनी में तब्दील कर दिया गया। घंटों पदाधिकारी और कर्मी अपने-अपने कक्ष में बंधक बने रहे। एसडीओ भवेश मिश्रा और डीएसपी सिटी के हस्तक्षेप के बाद डीएसडब्ल्यू प्रो. एनके झा और प्रॉक्टर प्रो. जीके पलई छात्र प्रतिनिधियों से वार्ता की।
प्रनिधिमंडल मीडिया कर्मियों की उपस्थिति में कुलपति से वार्ता पर अड़ गए। प्रशासन की देखरेख में प्रतिनिधिमंडल अपराह्न चार बजे के आसपास कुलपति आवास पहुंचा। दिव्यांशु भारद्वाज ने पक्षपात पूर्ण कार्रवाई को निरस्त करने की मांग कुलपति से की।
वहीं, कुलपति प्रो. रासबिहारी सिंह ने बताया कि यूनियन के पांच में से तीन पदाधिकारियों की डिग्री की जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है। चुनाव के लिए बनी नियमावली के अनुसार नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज और उपाध्यक्ष योशिता पटवर्धन का नामांकन वैध नहीं पाया गया है। मो. अजसद उर्फ आजाद चांद पर एकेडमिक एरियर का पालन नहीं करने का आरोप था, जिसे जांच कमेटी ने खारिज कर दिया है।
दिव्यांशु भारद्वाज को एक ही सेशन में दो विश्वविद्यालयों में नामांकन का दोषी पाया गया है। जिसके आधार पर उनका पीजी में नामांकन भी रद करने की कार्रवाई की जाएगी। योशिता पटवर्धन पार्ट वन में फेल थी, नामांकन के दौरान पार्ट टू में वह प्रमोट छात्रा है। नियमावली के अनुसार प्रमोट विद्यार्थी छात्रसंघ चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। इसके आधार पर उपाध्यक्ष का नामांकन रद किया गया है।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में महासचिव छात्रसंघ यूनियन का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि निर्णय पर किसी पुसु पदाधिकारी या विद्यार्थी को आपत्ति है तो वह कुलाधिपति और हाईकोर्ट में अपील करने के लिए स्वतंत्र हैं।

 
इस मामले में पीयू छात्र संघ चुनाव के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज ने विश्वविद्यालय प्रशासन को दोषी ठहराया! उन्होंने कहा कि शुरुआत में कागजात की क्यों जांच नहीं की गई और जब मैं निर्वाचित हुआ तो सवाल उठाये जाने लगे।

भारद्वाज ने कहा कि मेरे ऊपर लगे सभी आरोप गलत हैं और अगर निर्वाचन रदद् होता है तो विश्वविद्यालय के ख़िलाफ़ मैं कोर्ट जाउंगा. दोनों निर्वाचित सदस्य सेंट्रल पैनल के सदस्य थे ऐसे में उनका निर्वाचन रद्द होने के बाद अब सेंट्रल पैनल के तीन सदस्य ही कार्य करेंगे।

बता दें कि करीब 5 साल बाद पटना विश्‍वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव हुआ था। इस चुनाव में अध्‍यक्ष पद पर दिव्‍यांशु भारद्वाज अध्‍यक्ष पद पर चुने गए थे और योषिता पटवर्धन उपाध्‍यक्ष पद पर। चुनाव के बाद कई छात्र संगठनों ने इनकी डिग्री को लेकर सवाल उठाये थे। जिसके बाद तीन सदस्‍यीय कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने अध्‍यक्ष और उपाध्‍यक्ष के निर्वाचन को रद कर दिया।

Posted By: Ravi Ranjan