जागरण टीम, पटना। 22 अगस्त को बकरीद की नमाज राजधानी के विभिन्न ईदगाहों, खानकाहों और मस्जिदों में अदा की गई। इसके साथ ही राज्य के अन्य जिलों में भी शांति और सद्भाव के साथ बकरीद की नमाज अदा की गई। सुबह से ही पुलिस प्रशासन विभिन्न जगहों पर तैनात है और सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बकरीद की नमाज सुबह आठ बजे अदा की गई।

शेखपुरा में ईद-उल-अजहा पर बुधवार को विभिन्न मस्जिदों में नमाज के पहले विशेष तकरीर का आयोजन किया गया। इन तकरीरों में मुस्लिम विद्वानों ने लोगों को ईद-उल-अजहा का महत्व समझाया। तकरीरों में कहा गया कि मानवता ही सबसे बड़ा कर्तव्य है। तकरीरों में कहा गया कि जरूरतमंद लोगों की सेवा तथा उनकी मदद करना ही सबसे बड़ा मजहब है।

छपरा में बकरीद का त्योहार बुधवार को शहरी क्षेत्र से लेकर प्रखंड के सभी ग्रामीण इलाकों में धूमधाम से मनाया गया। प्रशासन की चुस्त व्यवस्था के बीच शांतिपूर्वक बकरीद का त्योहार संपन्न हुआ। बकरीद को लेकर सुबह से ही जिले के विभिन्न मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए मुसलमान भाइयों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।

 निर्धारित समय पर नमाज अदा करने के लिए नये परिधान में मुसलमान भाई मस्जिदों में पहुंचे थे। प्रशासन द्वारा भी शांति व्यवस्था कायम रखने को लेकर विशेष इंतजाम किये गये थे। एक दिन पहले ही डीएम व एसपी ने विशेष चौकसी बरतने का निर्देश दिया था। छपरा शहर के जामा मस्जिद सहित सभी प्रमुख मस्जिदों में नमाज अदा की गई। 

 

गोपालगंज में बुधवार को पूरे जिले में परंपरागत ढंग से ईद-ए-कुरबानी मनाई गई। इस पर्व पर मुसलमान भाइयों ने मस्जिदों में बकरीद की नमाज अदा की और घरों पर आकर बकरे की कुर्बानी दी। मस्जिदों में नमाज अदा करने वालों की भीड़ देखी गई। बकरीद को लेकर सुरक्षा की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रही। जिला मुख्यालय सहित चिन्हित किए गए तमाम स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात रहे। 

बकरीद को लेकर मुसलमान भाइयों ने दो दिन पहले से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। बुधवार की सुबह बकरीद के मौके पर नमाज अदा करने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। शहर के दरगाह मस्जिद, बड़ी मस्जिद सहित जिले के सभी मस्जिदों में बकरीद की नजाम अदा करने के बाद मुस्लिम भाइयों ने अपने अपने घरों पर बकरे की कुर्बानी दी।

दरगाह मस्जिद के इमाम ने बताया कि ईद-उल-अजहा को बकरीद भी कहा जाता है। अपने रब की राह में कुर्बानी के जज्बे से लबरेज होकर राहे खुदा में उनका सच्चा फरमावदार बन जाना ही इस पाक पर्व का मकसद है।

पैगंबर इब्राहिम से खुदा ने अपनी राह में सबसे अजीज चीज की कुर्बानी देने का हुक्म किया तो वे अपने कलेजे के टुकड़े बेटे हजरत इस्माइल को खुदा की राह में कुर्बानी करने को तैयार हो गए। यह था जज्बा-ए-इब्राहिम। जिसने कुर्बानी व खुदा की फरमावदारी करने की एक अजीम मिशाल कायम की। यह वहीं पैगंबर इब्राहिम थे, जिन्हें जब उनके रब ने आवाज दी, तो नंगे पांव दहकते अंगारे पर चल पड़े।

औरंगाबाद में भी आपसी प्रेम का परिचायक व कुर्बानी का पर्व बकरदी शांतिपूर्ण माहौल में बुधवार को संपन्न हो गया। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने ईदगाह के साथ मस्जिद में सामूहिक नमाज अदा की। नमाज के बाद एक-दूसरे से गले मिल बधाई दी। 

सीएम नीतीश ने दी ईद-उल-अजहा की बधाई

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर प्रदेश एवं देशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि ईद-उल-अजहा का त्योहार असीम आस्था का त्योहार है। खुदा के हुक्म पर बड़ी से बड़ी कुर्बानी दिये जाने के लिये तैयार रहना इस त्योहार का आदर्श है। यह त्योहार कुर्बानी के महत्व को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने इस त्योहार को मेल-जोल, आपसी भाईचारा एवं सद्भाव के साथ मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि त्योहारों का आनंद आपसी भाईचारा एवं मेल-जोल के साथ मिलकर मनाने से बढ़ता है और त्योहार का सच्चा आनंद मिलता है।

Posted By: Kajal Kumari

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