पटना, जेएनएन। कोटा में रहने-पढ़ने का खर्च, बच्चों के अकेले रहने की वजह से अवसाद और लॉकडाउन जैसी प्राकृतिक-सामाजिक आपदा की स्थिति में होने वाली परेशानियों ने बिहार के उन अभिभावकों को डरा दिया है, जो अपने बच्चों को कोटा पढ़ने के लिए भेजते हैं। इन अभिभावकों की चिंता को समझते हुए बिहार के कोचिंग संस्थान तैयारी कर रहे।

बड़ा तनाव हो जाता है

मुजफ्फरपुर पताही के दिलीप कुमार के बड़े पुत्र ने इसी वर्ष मैट्रिक पास किया है। लंबे समय से उनकी चाहत कोटा या दिल्ली में कोचिंग कराने की थी। अब वह नए ढंग से सोच रहे। वह कहते हैं कि बेटे को कोटा नहीं भेजेंगे। शहर के ही किसी अच्छे कोचिंग में पढ़ाएंगे। उनकी पड़ोसन नीलू कुमारी का बेटा कोटा में ही रहता था। अभी लौटा है। वह भी दिलीप जी को सलाह देती हैं कि बेटे को कोटा नहीं भेजें। बड़ा तनाव हो गया। कोरोना की वजह से लॉकडाउन ने बिहार के अभिभावकों की मनोदशा बदली है। कुछ यह भी कहते हैं कि स्थितियां सामान्य होंगी, तो बच्चे को फिर कोटा भेजेंगे। कोर्स फी जमा है। थोड़ा रिस्क तो लेना ही पड़ता है। 

माहौल बनाने में थोड़ा समय लगेगा

मुजफ्फरपुर के एंबीशन कोचिंग के अमीय वर्मा अभिभावकों की चिंता को जायज बताते हैं। वह कहते हैं कि हम राष्ट्रीय स्तर के ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालयों के शिक्षक से तैयारी करवाते हैं। विद्यार्थी मेहनत करें तो अपने शहर में रहकर ही मनचाही मंजिल पा सकते हैं। यहां खर्च भी कम होगा और घर भी रहेंगे। हां, कोटा जैसा माहौल बनाने में समय लगेगा। कॅरियर अचीवर के निदेशक डॉ. शशिरंजन कुमार कहते हैं कि कोटा में बिहार के ही सैकड़ों शिक्षक नामचीन संस्थानों में इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी कराते हैं। अपने शहर मुजफ्फरपुर में भी कोटा के टक्कर की पढ़ाई की व्यवस्था है। 

भागलपुर में भी कोटा और दिल्ली जैसी तैयारी 

भागलपुर में भी कोटा, दिल्ली और मुंबई जैसी स्मार्ट पढ़ाई होगी। कोचिंग संस्थानों के प्रबंधनों की मानें तो यहां के शिक्षक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने में सक्षम हैं। आइआइटियन व वीजे इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक वाचस्पति झा ने बताया कि कोटा से लौटे शिक्षकों ने यहां के कोचिंग संस्थानों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। तीन शिक्षक उनके पास भी आए थे। लॉकडाउन समाप्त होने के बाद उन्हें बायोडेटा देने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस शहर में काफी मेधावी शिक्षक हैं। कोटा से लौटे मेधावी छात्रों को पढ़ाने में उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। कोचिंग संस्थान और बेहतर व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राथमिकता के तौर पर कोटा से लौटे छात्रों का पहले 12वीं का सिलेबस पूरा कराना होगा। मेडिकल-इंजीनियरिंग की पढ़ाई में छूटे टॉपिक को पूरा करना होगा। इसके बाद टेस्ट सीरीज के माध्यम से छात्रों को अभ्यास कराया जाएगा। 

तो बेहतर पढ़ाई का करेंगे प्रयास

दिशा न्यूक्लियस के निदेशक रामकृष्ण ने बताया कि कोटा में एप्लीकेशन बेस्ट ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जाती है। संस्थान में नेक्स्ट एजुकेशन के लर्निंग प्लेटफॉर्म पर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। यदि मेधावी बच्चे शहर में रुकेंगे तो शिक्षक भी बेहतर पढ़ाई करवाने का प्रयास करेेंगे। कोटा का डेली अभ्यास पत्र काफी अच्छा होता है। ऐसा भागलपुर में नहीं है। वहां का प्रबंधन हमेशा अभिभावकों के संपर्क में रहता है। कोटा के कुछ संस्थानों के शिक्षकों ने यहां पढ़ाने के लिए संपर्क किया है। शिक्षक अगले दो-तीन साल तक वहां नहीं लौटना चाहते हैं। ऐसे शिक्षकों की भी यहां मदद ली जाएगी।

Posted By: Rajesh Thakur

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