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बिहार: चावल दबाकर डकारे करोड़ों, ED ने एरिना फूड्स के निदेशकों की प्रॉपर्टी की अटैच

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:18 PM (GMT+05:30)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धान के बदले चावल की कम आपूर्ति और सरकारी राशि का भुगतान न करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

धान घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, राइस मिल संचालक की करोड़ों की संपत्ति जब्त (AI Generated Image)

धान घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, राइस मिल संचालक की करोड़ों की संपत्ति जब्त (AI Generated Image)

HighLights

  1. ईडी ने धान घोटाले में 1.09 करोड़ की संपत्ति जब्त की।

  2. चावल आपूर्ति न करने पर एरिना फूड एंड एग्रो इंडस्ट्रीज पर कार्रवाई।

  3. सरकारी खजाने को पांच करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ।

राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में धान के बदले चावल की कम आपूर्ति करने और सरकारी राशि का भुगतान नहीं करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है।

ईडी के पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने शेखपुरा स्थित एरिना फूड एंड एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े लोगों की एक करोड़ नौ लाख 26 हजार 808 रुपये की अचल संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच (जब्त) कर ली है।

यह कार्रवाई सात अक्टूबर को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। इसके तहत कंपनी के निदेशक श्रीकृष्ण कुमार, शोभा कुमारी, कन्हैया कुमार और कुबेर कश्यप से जुड़ी अचल संपत्तियों को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।

शोभा कुमारी राधे शर्मा की पत्नी, जबकि कन्हैया कुमार और कुबेर कश्यप उनके बेटे बताए गए हैं। ईडी का आरोप है कि अपराध से अर्जित राशि का इस्तेमाल कारोबार में किया गया और अब वह रकम खर्च हो चुकी है।

ईडी के अनुसार, यह मामला वित्तीय वर्ष 2012-13 में बिहार राज्य खाद्य निगम (बीएसएफसी) से धान लेने के बाद निर्धारित मात्रा में चावल की आपूर्ति नहीं करने से जुड़ा है। आरोप है कि राइस मिल संचालक राधे शर्मा की कंपनी ने निगम से 63,092.45 क्विंटल धान खरीदा था।

समझौते के तहत 30 दिसंबर 2013 तक इसके 67 प्रतिशत के बराबर 42,271.94 क्विंटल कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की आपूर्ति करनी थी। हालांकि, कंपनी निर्धारित मात्रा के मुकाबले काफी कम चावल ही दे सकी।

सरकारी खजाने को पांच करोड़ का नुकसान:

जांच के अनुसार, चावल की आपूर्ति में कमी के कारण सरकारी खजाने को पांच करोड़ 28 हजार 637 रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी ने बीएसएफसी को एक करोड़ 21 लाख रुपये का भुगतान किया था।

इसके बाद भी तीन करोड़ 79 लाख 28 हजार 637 रुपये बकाया रह गया। इसी राशि को कथित अपराध से अर्जित कमाई मानकर जांच की जा रही है।

ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर चावल खुले बाजार में नकद बेच दिया। प्राथमिकी दर्ज होने और खाद्य निगम की ओर से बार-बार याद दिलाने के बावजूद बकाया राशि वापस नहीं की गई।

जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के खातों से रकम निकालकर उसके निदेशकों, राधे शर्मा के परिवार के सदस्यों और उनके बेटों की कंपनियों के खातों में भी जमा की गई है। मामले में आगे की जांच जारी है।