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रात में पसीना, गर्दन में गांठ और लगातार थकान? डॉक्टरों ने बताया- ये लिम्फोमा कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं

Published: Sat, 30 May 2026 08:37 PM (IST)

Early Cancer Signs: पटना में विशेषज्ञों ने लिम्फोमा और मूत्राशय कैंसर के शुरुआती लक्षणों पर चर्चा की, जिसमें थकान, रात ...और पढ़ें

लिम्फोमा और मूत्राशय कैंसर के शुरुआती लक्षण

लिम्फोमा और मूत्राशय कैंसर के शुरुआती लक्षण

HighLights

  1. लगातार थकान, रात में पसीना लिम्फोमा के संकेत।

  2. दर्दरहित गांठ, पेशाब में खून मूत्राशय कैंसर के लक्षण।

  3. समय पर जांच, आधुनिक उपचार से बढ़ती है उम्मीद।

जागरण संवाददाता, पटना। लगातार थकान, रात में अत्यधिक पसीना आना और बिना वजह वजन कम होना सामान्य समस्या नहीं हो सकती। विशेषज्ञों के अनुसार ये लिम्फोमा (ब्लड कैंसर) के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

पटना में आयोजित ‘ऑन्को अपडेट एवं लिम्फोमा सेमिनार’ में डॉक्टरों ने इस पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि कैंसर की शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। लोग अक्सर इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं।

यही लापरवाही बाद में गंभीर परिणाम का कारण बन सकती है।

दर्दरहित गांठ भी हो सकती है खतरे की घंटी

टाटा मेमोरियल अस्पताल, मुंबई के वरिष्ठ रक्त रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित गुजराल ने कहा कि लिम्फोमा के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं।

गर्दन, बगल या कमर के पास दर्दरहित गांठ बनना इसका प्रमुख संकेत हो सकता है।

इसके अलावा सांस लेने में परेशानी और लगातार कमजोरी भी बीमारी की ओर इशारा करती है।

उन्होंने बताया कि श्वेत रक्त कणों के डीएनए में म्यूटेशन इसकी मुख्य वजह बनता है। इससे लिम्फोसाइट्स की अनियंत्रित वृद्धि शुरू हो जाती है।

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

ब्लैडर कैंसर के लक्षणों को भी गंभीरता से लें

टाटा मेडिकल सेंटर, कोलकाता के डॉ. प्रशांत पांडे ने मूत्राशय कैंसर के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि बार-बार पेशाब आना या पेशाब में जलन होना सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

पेशाब में खून आना, पीठ या जांघ में दर्द भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। भूख कम लगना और तेजी से वजन घटना भी चेतावनी के संकेत हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि इन लक्षणों को केवल संक्रमण या उम्र बढ़ने से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।

समय रहते जांच कराने से बीमारी का पता जल्दी लगाया जा सकता है।

कैंसर मरीजों के लिए मानसिक सहयोग भी जरूरी

पैलिएटिव केयर विशेषज्ञ डॉ. राजू कुशवाहा ने कहा कि कैंसर का इलाज केवल दवाओं और सर्जरी तक सीमित नहीं है।

मरीजों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। इससे वे बीमारी से जुड़ी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं।

परिजनों की भूमिका भी उपचार प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण होती है। सकारात्मक माहौल मरीज के आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
विशेषज्ञों ने समग्र देखभाल पर जोर दिया।

आधुनिक इलाज से बढ़ रही मरीजों की उम्मीद

मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक आनंद ने मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर के आधुनिक उपचारों की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि टारगेटेड थेरेपी जैसी नई तकनीकों ने उपचार को अधिक प्रभावी बनाया है। अब मरीजों की जीवन अवधि और जीवन गुणवत्ता दोनों में सुधार देखा जा रहा है।

कैंसर उपचार के क्षेत्र में लगातार नए शोध और तकनीकें सामने आ रही हैं। इनका लाभ मरीजों तक पहुंचाना जरूरी है।

विशेषज्ञों ने जागरूकता और समय पर जांच को सबसे बड़ा हथियार बताया।

देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सेमिनार में पद्मश्री सम्मानित डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने भाग लिया।

महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ. बी. सान्याल भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। इसके अलावा डॉ. मनीषा सिंह, डॉ. राजीव रंजन प्रसाद सिन्हा और अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को कैंसर उपचार की नई तकनीकों से अवगत कराना था।

विशेषज्ञों ने कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। संदेश साफ था कि समय पर जांच और सही इलाज से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।