पटना। 'हर कदम पर बंद थे सब रास्ते, हर कदम पर मुझको पछताई मिली, वो कफ-ए-अफसोस मलता रह गया, जब मेरी बातों में सच्चाई मिली..' डॉ. शकर प्रसाद ने बिहार हिदी साहित्य सम्मेलन में जब अपनी ये कविता सुनाई तो उपस्थित साहित्यप्रेमी वाह-वाह कर उठे। बिहार हिदी साहित्य सम्मेलन तथा चित्रगुप्त सामाजिक संस्थान, पटना सिटी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को डॉ. दीनानाथ शरण का स्मृति दिवस मनाया गया। इस मौके पर कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया। कवि-सम्मेलन का आरंभ चंदा मिश्र ने वाणी-वंदना से किया। वरिष्ठ गजलगो मृत्युंजय मिश्र 'करुणेश' ने 'टूटे दिल में सौ अरमान लिए गुजरा हूं, मैं मरघट-मरघट में प्राण लिए गुजरा हूं..' गाकर सुनाई। कवयित्री आराधना प्रसाद, रमेश कंवल, ओम प्रकाश पांडेय 'प्रकाश', कुमार अनुपम, बच्चा ठाकुर, मधुरेश नारायण, कुमारी स्मृति, मधुरानी लाल, सुनील कुमार दूबे, डौली बगड़िया, डॉ. विनय कुमार विष्णुपुरी, अभिलाषा कुमारी, पं गणेश झा, नीरव समदर्शी, अरविंद कुमार सिंह, श्रीकात व्यास, डॉ. कुंदन कुमार, प्रभात धवन, डॉ. आर प्रवेश, रंजन कुमार सिंह, अश्विनी कुमार कविराज आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं का पाठ किया। अतिथियों का स्वागत सम्मेलन के प्रधानमंत्री डॉ. शिववंश पांडेय ने तथा मंच का संचालन योगेंद्र प्रसाद मिश्र ने किया। धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने की।

मनुष्यता की कविताएं लिखते रहे डॉ. दीनानाथ

डॉ. दीनानाथ शरण को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वे यश की कामना से दूर, जीवनपर्यत साहित्य और पत्रकारिता की एकातिक सेवा करते रहे। वे कवि का एक विराट हृदय रखते थे। मनुष्यता और जीवन-मूल्यों की कविताएं रचते रहे। सम्मेलन के उपाध्यक्ष नृपेंद्रनाथ गुप्त, डॉ. शकर प्रसाद, प्रो. इंद्रकात झा, डॉ. राज भवन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्धन मिश्र तथा कमल नयन श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

प्रो. मंगलमूर्ति को मिला सम्मान

इस अवसर पर साहित्यकार प्रो. मंगलमूर्ति को 'डॉ. दीनानाथ शरण स्मृति सम्मान' से विभूषित किया गया। सम्मान-स्वरूप उन्हें वंदन-वस्त्र, स्मृति-चिह्न और सम्मान-पत्र प्रदान किया गया। मौके पर सासद और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सीपी ठाकुर ने कहा कि प्रो. मंगलमूर्ति, एक महान और विद्वान पिता आचार्य शिवपूजन सहाय के पुत्र होने के साथ-साथ स्वयं एक विद्वान प्राध्यापक और साहित्यकार हैं।

Posted By: Jagran

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