कुत्ते के काटने पर न करें ये गलती! 15 मिनट का काम बचा सकता है जान, एक्सपर्ट ने बच्चों को समझाया
विश्व रेबीज दिवस पर पटना में स्कूली बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने रेबीज के ...और पढ़ें

पालतू पशुओं का टीकाकरण भी जरूरी
HighLights
रेबीज दिवस पर स्कूली बच्चों को बचाव के तरीके बताए गए।
कुत्ते के काटने पर घाव को 15 मिनट तक धोना आवश्यक है।
घरेलू उपचार से बचें, तुरंत डॉक्टर से सलाह और टीकाकरण कराएं।
जागरण संवाददाता, पटना। विश्व रेबीज दिवस पर बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय में स्कूली बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय, नेहरू पथ और राजकीय प्राथमिक विद्यालय, बिंदटोली, शेखपुरा में विशेषज्ञों ने बच्चों को रेबीज के खतरे और बचाव के तरीके बताए।
कार्यक्रम का नेतृत्व विभागाध्यक्ष डा. पुरुषोत्तम कौशिक ने किया। डा. सेउली साहा राय, डा. मनोज कुमार, डा. अंजय और डा. भूमिका ने विद्यार्थियों को रेबीज संक्रमण, रोकथाम और नियंत्रण की जानकारी दी।
कुत्ते के काटने पर 15 मिनट जरूरी
विशेषज्ञों ने बताया कि रेबीज गंभीर विषाणुजनित और जूनोटिक बीमारी है। मानव रेबीज के करीब 99 प्रतिशत मामलों में कुत्ते संक्रमण के प्रमुख स्रोत होते हैं। इसलिए कुत्ते के काटने या संदिग्ध संक्रमित पशु के संपर्क में आने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
बच्चों को बताया गया कि कुत्ते या किसी संदिग्ध संक्रमित पशु के काटने अथवा खरोंच लगने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
वैक्सीन में देरी पड़ सकती है भारी
विशेषज्ञों के अनुसार स्थिति के आधार पर एंटी-रेबीज वैक्सीन और रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए काटने के बाद घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय समय पर चिकित्सा सहायता लेना महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में बच्चों को अंधविश्वास और घरेलू नुस्खों से बचने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों ने कहा कि रेबीज से बचाव में जागरूकता के साथ-साथ समय पर चिकित्सा उपाय भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
पालतू पशुओं का टीकाकरण भी जरूरी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बच्चों को पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराने के लिए भी प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि पशुओं का समय पर टीकाकरण रेबीज के प्रसार को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को रेबीज के प्रति जागरूक करना और किसी पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले सही कदमों की जानकारी देना था।
