पटना, जेएनएन। चर्मरोग के इलाज में लेजर तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। खासकर चेहरे को सुन्दर बनाने में लेजर तकनीक किसी वरदान से कम नही है। यही कारण है कि नई पीढी लेजर तकनीक के प्रति तेजी से आकर्षित हो रही है। आजकल महिलाओं में इसके प्रति खासा आकर्षण देखा जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि लेजर तकनीक का रिजल्ट भी काफी बेहतर देखने को मिल रहा है। 

पहले चेहरे पर काले तिल या बाल बड़ी समस्या होते थे लेकिन अब चेहरे पर किसी तरह के कील-मुहांसों एवं बालों को लेजर तकनीक की सहायता से आसानी से हटाया जा सकता है। 

चर्मरोग विशेषज्ञों का कहना है कि चेहरे की झुर्रियों को हटाने में भी यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो रही है। प्राय: देखा जाता है कि 50 की उम्र के बाद लोगों के चेहरे पर झुर्रियां आने लगती है।

पहले इस तरह की तकनीक का उपयोग फिल्मी दुनिया के कलाकार करते थे, लेकिन अब यह तकनीक धीरे-धीरे आम लोगों तक सुलभ होने लगी है। झांईयों में भी लेजर तकनीक बेहद लाभदायक साबित हो रही हैं। उनको दूर करना अब काफी आसान हो गया है। चिकित्सक कुछ आवश्यक जांच के उपरांत लेजर तकनीक से झाईयों को हटा देते हैं। 

: कुछ सावधानी भी जरूरी :

गर्भवती महिलाओं को लेजर तकनीक से दूर रहने की जरूरत होती है। लेजर किरण के कारण गर्भ में पल रहे बच्चे को काफी खतरा हो सकता है। उनमें जन्मजात विकृति आ सकती है।

- हार्ट के मरीजों को भी सावधान रहने की जरूरत है।

हार्ट के मरीजों को भी लेजर किरणों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। खासकर जिन मरीजों को पेसमेकर लगा होता है, उनके लिए लेजर किरण घातक साबित हो सकती है। पेसमेकर में खराबी भी आ सकती है।

डॉ.मधुरेंद्र कुमार सिन्हा

चर्मरोग विशेषज्ञ, नालंदा मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पिटल, पटना 

Posted By: Kajal Kumari

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